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मेघदूत रेडियो लिस्नर्स क्लब ने किया पुण्यतिथि पर सुरों के बादशाह मो. रफी को याद

ए. जायसवाल/पेटरवार (बोकारो)। भारतीय फिल्मोधोग में अपने समय के प्रख्यात गायक व सुरों के बादशाह मोहम्मद रफी 31 जुलाई को 46वीं पुण्यतिथि पर खूब याद आए। बोकारो जिला के हद में मेघदूत रेडियो लिस्नर्स क्लब फुसरो बेरमो की ओर से उनकी याद को ताजा किया गया।

क्लब के साथियों तथा उनके अनुवाइयों को बता दूं कि दिवंगत रफी साहब का जन्म 24 दिसंबर 1924 में अमृतसर (पंजाब) में हुआ था। उनमें बचपन से ही संगीत में काफी लगाव रहा। वे संगीत सम्राट प्रोफेसर कुंदनलाल सहगल के संपर्क में आए। पेशेवर गायन क्षेत्र में उन्होंने बीस वर्ष की आयु में ही वर्ष 1944 में कदम रखा। अपने साढे तीन दशक यानि 35 वर्ष तक की गायन के दौर में उन्होंने हजारों गानो को अपनी मधुर आवाज से पिरोया है।

तब श्वेत श्याम (ब्लैक एंड व्हाइट) फिल्म दोस्ती की सभी गानों को गाकर मो. रफी ने सफलता हासिल की। वर्ष 1950 में बनी फिल्म दुलारी का गाना सुहानी रात ढल चुकी, न जाने तुम कब आओगे, वर्ष 1952 में फिल्म बैजू बावरा में मन तड़पत हरि दर्शन को आज, वो दुनिया के रखवाले, तू गंगा की मौज में आदि गाने गाए। साठ के दशक में चाहे कोई मुझे जंगली कहे (जंगली-1961), चांद सा रोशन चेहरा (1964), बहारों फूल बरसाओ फिल्म सूरज (1966), सत्तर के दशक में वर्ष 1970 में बनी फिल्म दी ट्रेन में गुलाबी आंखें जो मैने देखी, लिखे जो खत तुझे (कन्यादान), तेरी आंखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है (चिराग), चांद मेरा दिल, चांदनी हो तुम (हम किसी से कम नहीं,1977), इसी वर्ष फिल्म धर्मवीर में ओ मेरी महबूबा, हुई शाम उनका ख्याल आ गया, मेरे हमदम मेरे दोस्त (1968), सुख के सब साथी दुख में न कोई (गोपी), 1980 के दशक में बनी फिल्मों में शिरडी वाले साईं बाबा, पर्दा है पर्दा है (अमर अकबर एंथनी) काफी लोकप्रिय रहा।

इसी तरह सदाबहार गानों में सुनील दत्त की फिल्म गबन, मेरा साया, मेहरबान, हीरा, गौरी, खानदान, जितेंद्र की फिल्म औलाद, मेरे हुजूर, फर्ज, खिलौना, जिगरी दोस्त, संजीव कुमार की फिल्म राजा और रंक, देवी, जानी दुश्मन, नागिन, भाई भाई, काजल, चरस, गीत, दोस्त, पुरानी फिल्म गंवार, नया दौर, संघर्ष, गंगा जमना, राजकुमार, बदतमीज, मेरे हुजूर, वक्त, याराना आदि फिल्मों के गाने मो.रफी की काफी हिट रहा।

कुदरत ने उन्हें 56 वर्ष की अल्प आयु में ही हमसे छीन लिए। 31 जुलाई 1980 को वे हमसब से हमेशा के लिए जुदा हो गए। आज मेघदूत लिस्नर्स क्लब के उपाध्यक्ष के नाते मैं अपनी क्लब से जुड़े तमाम श्रोताओं की ओर से दिवंगत रफी साहब को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

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