एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। आरएसएस अपनी आय, संपत्ति और कानूनी स्थिति सार्वजनिक करे। भाजपा सांसद के बयान ने संघ का असली चेहरा उजागर किया है। उक्त बाते झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 22 जून को कही। उन्होंने कहा कि जो संगठन देशभक्ति का प्रमाण पत्र बांटता है, उसे भी जनता के प्रति जवाबदेह होना होगा।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कहा कि कर्नाटक सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कानूनी स्थिति, आय के स्रोतों, संपत्तियों एवं गतिविधियों की जानकारी मांगे जाने के बाद पूरे देश में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस प्रारंभ हो गयी है। झारखंड सरकार को भी कर्नाटक की तर्ज पर आरएसएस एवं उससे संबद्ध संस्थाओं की वित्तीय और प्रशासनिक जानकारी सार्वजनिक करने की पहल करनी चाहिए।
नायक ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी संस्था संविधान और कानून से ऊपर नहीं हो सकती। कहा कि जब राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, ट्रस्टों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को अपनी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करनी पड़ती है, तो आरएसएस को भी अपनी आय, व्यय, संपत्तियों और फंडिंग के स्रोतों का खुलासा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद के बीच कर्नाटक के भाजपा सांसद रमेश जिगाजिनगी का बयान अत्यंत चिंताजनक और संघ की मानसिकता को उजागर करने वाला है। कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खड़गे द्वारा आरएसएस की कानूनी स्थिति और फंडिंग पर सवाल उठाने पर भाजपा सांसद का यह कहना कि जिसने भी आरएसएस से पंगा लिया, वह कभी बच नहीं पाया लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने कहा कि यह बयान बताता है कि आरएसएस स्वयं को लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक जवाबदेही से ऊपर समझता है। यदि कोई गृहमंत्री किसी संगठन से उसकी कानूनी स्थिति और वित्तीय स्रोतों के बारे में जानकारी मांगता है तो यह उसका संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य है, न कि किसी प्रकार का अपराध।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान समानता, सामाजिक न्याय और बंधुत्व के सिद्धांतों पर आधारित है, जबकि समय-समय पर आरएसएस के वैचारिक इतिहास को लेकर ऐसे प्रश्न उठते रहे हैं कि वह संविधान की मूल भावना के प्रति कितना प्रतिबद्ध है। कहा कि देश के करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, महिलाओं और वंचित वर्गों को जो अधिकार संविधान ने दिए हैं, उनकी रक्षा करना हर लोकतांत्रिक नागरिक का कर्तव्य है।
नायक ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि आरएसएस अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट करे, अपनी आय और संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करे तथा यह बताए कि उसके पास प्राप्त होने वाली धनराशि किन स्रोतों से आती है और उसका उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जाता है। कहा कि जो संगठन प्रतिदिन राष्ट्रवाद और पारदर्शिता का पाठ पढ़ाता है, उसे स्वयं भी जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने झारखंड सरकार से मांग की कि राज्य में संचालित आरएसएस एवं उससे संबद्ध संस्थाओं की गतिविधियों, वित्तीय स्रोतों, चल-अचल संपत्तियों तथा सरकारी सुविधाओं के उपयोग से संबंधित उपलब्ध सूचनाओं का संकलन कर उन्हें सार्वजनिक किया जाए, ताकि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना और मजबूत हो सके।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं बल्कि नागरिक अधिकार है। जो संगठन दूसरों से जवाब मांगता है, उसे स्वयं भी जनता के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए। कहा कि संविधान सर्वोपरि है और संविधान से ऊपर कोई व्यक्ति, संगठन या विचारधारा नहीं हो सकती।
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