अधिकारियों की मनमानी और कॉरिडोर के नक्शे को ले रहिवासियों में नाराजगी
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। क्या हरिहरनाथ कॉरिडोर सारण जिला के हद में स्थित सोनपुर की प्रसिद्ध पौराणिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को मटियामेट कर देगा? यह सवाल 22 जून को टोपोलैंड संघर्ष समिति द्वारा आयोजित महापंचायत में जमकर गूंजा। जिसने भी इस कॉरिडोर के प्रस्तावित नक्शे को देखा या उसके बारे में सुना, वे चिंतित नजर आये। जिस योजना की घोषणा पर कुछ माह पूर्व पूरा सोनपुर खुशियां मना रहा था, आज उसी कॉरिडोर के नक्शे को प्राचीन धरोहरों को नष्ट करने वाला बताते हुए क्षेत्र के आम व् खास बिहार सरकार, सारण जिला प्रशासन और नक्शा तैयार करने वालों को कोस रहे हैं।
टोपोलैंड संघर्ष समिति के अनुसार विशेष बात यह है कि यह महापंचायत सोनपुर के जिस ऐतिहासिक लोक सेवा आश्रम के सांस्कृतिक मंच पर आयोजित की गयी, कॉरिडोर के कारण उसी का वजूद खतरे में है। मंच से अधिवक्ता अवधेश सिंह और भाजपा नेता धनंजय सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने प्रस्तावित नक्शे पर उंगली उठाते हुए कहा कि इसके लागू होने से सोनपुर का लोक सेवा आश्रम समेत कई प्राचीन मठ-मंदिरों का अस्तित्व मिट जाएगा।
समिति के धनंजय सिंह ने कहा कि बाबा हरिहरनाथ का मंदिर 108 फीट ऊंचा नहीं बन सका, जिसकी कई बार घोषणा की गयी थी। बावजूद इसके जब आश्रम परिसर में 108 फीट का हनुमान मंदिर बनना शुरू हुआ, उस पर रोक लगा दी गई। वहीं, समाजसेवी सुधीर कुमार सिंह ‘भोला’ ने मंच से हरिहरनाथ कॉरिडोर के स्वीकृत नक्शे को तत्काल सार्वजनिक करने की मांग की।
महापंचायत में सोनपुर अनुमंडल के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि अधिकारी भू-स्वामियों को बिना कोई लिखित नोटिस या मौखिक सूचना दिए अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे हैं। कहा गया कि प्रशासन द्वारा ऊपरी आदेश का हवाला देकर कहीं वर्षों से चल रहे मंदिर निर्माण को रुकवाया जा रहा है, तो कहीं आम रहिवासियों के निजी मकानों के निर्माण पर रोक लगाई जा रही है।
टोपोलैंड संघर्ष समिति के अध्यक्ष विनोद सिंह सम्राट ने भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि सारण जिला मुख्यालय छपरा में असर्वेक्षित भूमि की रजिस्ट्री धड़ल्ले से हो रही है, जबकि सोनपुर में बिना किसी लिखित सरकारी आदेश के रजिस्ट्री बंद कर दी गई है। कहा कि लोक सेवा आश्रम में करोड़ों रुपये की लागत से पिछले कई वर्षों से दक्षिणमुखी संकटमोचन हनुमान मंदिर का निर्माण चल रहा था। काम लगभग पूरा होने वाला था कि सोनपुर के अनुमंडल पदाधिकारी ने इस पर रोक लगवा दी। कथित तौर पर अधिकारियों की धमकी के कारण मजदूरों को काम छोड़कर भागना पड़ा।
बताया जा रहा है कि कॉरिडोर के नक्शे में इस ऐतिहासिक आश्रम को हटाने का चिह्न (मार्किंग) लगाया गया है, जिसे लेकर महापंचायत में गहरी चिंता व्यक्त की गई। कहा गया कि यह आश्रम सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व का केंद्र है। इस धरोहर को बचाये रखना हम सभी का नैतिक कर्तव्य है। ज्ञात हो कि उदासीन संप्रदाय का यह वही पवित्र आश्रम है जहां बाबा राम लखन दास और बाबा राम दास सहित अनेक संतों की समाधियां हैं। इसके कण-कण से शास्त्रीय संगीत और नृत्य की गूंज जुड़ी है। इसी ऐतिहासिक मंच पर हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर के कला-साधक अपनी कला का प्रदर्शन करते रहे हैं। इस आश्रम के अखिल भारतीय नृत्य, संगीत एवं वाद्य सम्मेलन के अध्यक्ष भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और इसके संस्थापकों में पद्म विभूषण पंडित किशन महाराज जैसी महान विभूतियां शामिल रहे हैं।

उक्त आश्रम में भगवान सूर्य, शनि देव और उदासीन संप्रदाय के आचार्य श्रीचंद (गुरु नानक देवजी के पुत्र) की मूर्तियां स्थापित हैं। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को उजाड़ने का विचार कोई संवेदनहीन सरकार या प्रशासन ही कर सकता है। महापंचायत में बताया गया कि कॉरिडोर के मौजूदा स्वरूप से आस्था का केंद्र आपरूपी गौरी शंकर मंदिर, काली मंदिर, खाक चौक, राम जानकी ठाकुरबाड़ी और गोकर्ण दास की मठिया जैसी प्राचीन धरोहरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। कहा गया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने सरकार को जमीनी हकीकत की सही जानकारी नहीं दी है, जिससे स्थानीय रहिवासियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
इलाके में बीते दिनों हर घर काला झंडा आंदोलन के बाद अब मशाल जुलूस और जनता कर्फ्यू जैसे आंदोलनों की घोषणा की जा चुकी है, लेकिन सरकार और प्रशासन इस पूरे मामले पर अब तक मूकदर्शक बना है, यह समझ से परे है। जानकारी के अनुसार आगामी 29 जून को टोपोलैंड संघर्ष समिति के आह्वान पर जनता कर्फ्यू आंदोलन किया जायेगा।
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