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आर्य समाज के प्राण एवं राष्ट्रीय प्रेरणा जगाने वाले युग पुरुष थे स्वामी दयानंद-डॉ खान

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल कथारा में 12 फरवरी को आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की 202वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।

जानकारी देते हुए विद्यालय के शिक्षक रंजीत कुमार सिंह तथा बी. के. दसौंधी ने बताया कि इस अवसर पर विद्यालय के प्रातः कालीन प्रार्थना सभा में स्वामी दयानंद के प्रिय वैदिक मंत्रों के साथ उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी। विद्यार्थियों ने सुंदर एवं कर्णप्रिय गीत प्रस्तुत कर उनके जन -जागरण के महत्व को बताया। प्रार्थना सभा की सभी गतिविधियां स्वामीजी के जीवन एवं दर्शन पर आधारित रहा।

मौके पर विद्यालय के प्राचार्य सह- झारखंड जोन-आई के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉ जी.एन. खान ने इस पावन दिवस को सभी डीएवी विद्यालयों के लिए सबसे बड़ा त्योहार बताया। कहा कि डीएवी संस्थान आर्य समाज के नियमों का अनुसरण करता है। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद न केवल आर्य समाज के संस्थापक बल्कि एक देशभक्त, भाषाविद एवं समाज सुधारक थे। वे अंधविश्वासों, बाल- विवाह, बहु -विवाह एवं सती प्रथा जैसी कुरीतियों के घोर विरोधी थे। वे मानते थे कि नारी शिक्षा एवं नारियों के उत्थान से ही समाज विकसित बन सकता है। इस दिशा में उन्होंने असंख्य प्रयास किये। कहा कि वैदिक परंपरा के उत्थान के लिए स्वामी ने वेदों की ओर लौट चलो का नारा बुलंद किया। उनकी अमर एवं कालजयी कृति सत्यार्थ प्रकाश प्रेरणा का पुंज है और युगों- युगों तक वैदिक सभ्यता को दीप्तिमान करती रहेगी।

प्राचार्य सह एआरओ डॉ खान ने कहा कि निःसंदेह वर्तमान समय में स्वामीजी का जीवन एवं दर्शन हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। हमें उनके जीवन एवं कार्यों से एक अमर देशभक्त, सुसंस्कृत मानव समाज के लिए अपना जीवन होम कर देने वाले त्याग पुरुष बनने की प्रेरणा मिलती है।
इस पावन व् पुनीत वैदिक दिवस पर डीएवी कथारा के तमाम शिक्षक -शिक्षिकाओं, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों सहित समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहा।

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