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सोनपुर के सबलपुर पश्चिमी पंचायत में गंगा नदी में भीषण कटाव

अबतक आधा दर्जन से अधिक घर गंगा नदी में विलीन

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर अंचल के सबलपुर दियारे के पश्चिमी (पछियारी) पंचायत के उत्तरी भाग में 18 जुलाई को गंगा नदी के कटाव में आधा दर्जन से अधिक घर विलीन हो गए। कटाव से अबतक करोड़ों रुपए की संपत्ति का नुकसान होने की संभावना है। सैकड़ों बीघा कृषि योग्य उपजाऊ भूमि गंगा नदी मे समाहित हो गया है।

जानकारी के अनुसार गंगा नदी में कटवा इतनी अधिक भीषण थी कि रहिवास्ज अपने घरों से आवश्यक सामग्री तक नहीं निकाल सके। किसी तरह परिवार सहित जान बचाकर घर से निकल कर भागे। समय इतना कम था कि मवेशियों की जान बचाने के लिए रस्सा खोलकर भगाना पड़ा। कटाव ने इतना भी अवसर नहीं दिया कि मवेशी मालिक मवेशियों को ले जाकर सुरक्षित जगह बांध सके।

बताया जाता है कि सबलपुर पछियारी टोला वार्ड क्रमांक एक में नव घरवा मुहल्ले में इस कटाव से हड़कंप मचा है। कटाव पीड़ित रो – विलख रहे थे। बच्चे भी सहमे हुए थे। उपस्थित पत्रकारों के आंखों के सामने ही अशोक राय का पक्का घर नदी में विलीन होता दिखा। कटाव स्थल पर जिला परिषद सदस्य सुनील कुमार राय, स्थानीय रहिवासी रणजीत राय, बभन टोली के रजनीश शर्मा सहित बड़ी संख्या में कटाव पीड़ित ग्रामीण विवशता के साथ कटाव की विनाशलीला देख रहे थे। मौके पर छपरा से पहुंचे सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता रामबाबू राय भी मौजूद थे। वे अपनी टीम के साथ तत्काल बांस से कटाव को रोकने का असफल प्रयास करते दिखे।

महुआ बाग गांव के निकट नदी जल से भूमि का कटाव जारी

कटाव स्थल से सटे उत्तर सबलपुर उत्तरी पंचायत के महुआ बाग गांव के निकट भी गंगा नदी से उपजाऊ भूमि का कटाव धीरे -धीरे जारी है। जिससे ग्रामीणों में भय व्याप्त है। जिप सदस्य सुनील कुमार ने कहा कि इस क्षेत्र में कई वर्षों से बोरा से कटाव निरोधक कार्य हो रहा है। यह कोई सार्थक निदान नहीं है। कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो इससे सबलपुर दियारा सहित यहां का चारों पंचायत शायद हीं बचा रहेगा।

उन्होंने कहा कि सबलपुर दियारा के चारों पंचायतों को बचाने के लिए रिग बांध ही एक मात्र विकल्प है। उन्होंने रिंग बांध की मांग करते हुए कहा कि सारण जिला परिषद से रिंग बांध का प्रस्ताव पास है। डीएम के माध्यम से सिंचाई विभाग को ढाई सौ करोड़ राशि का प्रस्ताव भेजा गया है। सचिवालय उक्त प्रस्ताव पर कुंडली मारकर बैठ गया है।

कहा कि इधर गंगा के कटाव से सम्पूर्ण सबलपुर दियारा सिमटता जा रहा है। अभी थोड़ा पानी बढ़ा है तो यह हाल है। अभी दो माह से अधिक बरसात की मार झेलना है। उन्होंने बताया कि 10 – 12 घर कटा है। इन सभी विस्थापितों को तत्काल प्रशासन खाना – पीना मुहैया कराए। जिनका मकान नदी में समा गया उन्हें विशेष इंदिरा आवास योजना के तहत आवास प्रदान करे। तत्काल विस्थापितों के लिए चूड़ा -गुड़, पॉलीथिन, मवेशियों के लिए जरूरी चारा की व्यवस्था हो। कहा कि विस्थापितों के मुंह में एक दाना तक नहीं गया है।

स्थानीय समाजसेवी रणजीत राय कहते हैं कि सरकार की लापरवाही से आज तक सबलपुर दियारा के चारों पंचायत एवं राहर दियारा नजरमीरा पंचायत रिंग बांध से वंचित है। निकट ही डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर रिग बांध बना है। सबलपुर पछियारी टोला, चहारम, कंकड़ा, जगन्नाथ घाट होते हुए हरिहरनाथ तक रिंग बांध बन जाने से इन पांचों पंचायतों की सदा के लिए कटाव से सुरक्षा हो जायेगी। उन्होंने कहा कि रिंग बांध नहीं बनने पर सबलपुर दियारे के चारों पंचायतों की 40 हजार की आबादी पर सदैव कटाव का खतरा मंडराता रहेगा।

रहिवासी इसी तरह विस्थापित होते रहेंगे और रिंग बांध निर्माण का आश्वासन मिलता रहेगा। सबलपुर मध्यवर्ती पंचायत के बभन टोली रहिवासी रजनीश शर्मा ने कटाव स्थल पर बताया कि अगर इसी तरह कटाव होता रहा तो एक दिन सबलपुर दियारा ही कटाव में समा जायेगा। इसका एक मात्र विकल्प रिंग बांध निर्माण करना ही है। ग्रामीण रहिवासी बताते हैं कि सबलपुर पछियारी टोला वार्ड क्रमांक एक में नव घरवा मुहल्ले के आठ घर कटाव के शिकार हुए हैं जिनमें चंद्रदीप राय, साधु राय, मोहन राय, रामप्रसाद राय, लाल बाबू राय, बहादुर राय एवं रामबाबू राय शामिल हैं। इन्हीं घरों में कई रहिवासी बंटवारे के बाद भी एक ही घर में रहते थे वे भी प्रभावित हुए हैं। इस तरह घरों की मूल संख्या आठ है, परंतु 10 -12 परिवार प्रभावित हुए हैं ।

अस्सी के दशक से हर साल हो रहा कटाव, किसान होते रहे विस्थापित

सारण जिला के हद में सोनपुर अंचल के सबलपुर दियारा का दुर्भाग्य रहा है कि अस्सी के दशक से हर एक दो वर्ष बाद कभी गंगा तो कभी गंडक नदी से कटाव होता रहा है। हर बार यहां के वाशिंदे विस्थापित होते रहे हैं। कभी 22 हजार बीघा वाले इस दियारे का स्वतंत्रता आंदोलन और राज्यव्यापी किसान आंदोलन में अग्रणी भूमिका रही थी। यहां के किसानों ने अंग्रेजों एवं नवाबों से तो लड़कर अपनी जमीन बचा ली, पर स्वयं उनकी सरकार ने कभी भी किसान आंदोलन के इस गांव के विकास यात्रा में सहगामी बनना स्वीकार नहीं किया। दियारे की अनदेखी ने बाढ़ एवं कटाव का खतरा बढ़ा दिया।

आजादी के बाद से इस दियारे की उपजाऊ भूमि गंगा – गंडक में कट कर विलीन होती रही। अस्सी के दशक से दियारे का दक्षिणी और पश्चिमी भू-भाग का भीषण कटाव होना शुरू हुआ। वर्ष 1990 से 2000 के बीच सबलपुर दियारे का पटना के निकट का सबसे ऊंची जगह पर बसा टोला रायपुर हसन बंगाली टोला पूरी तरह गंगा नदी में समा गया। एक भी घर नहीं बचा। करीब आधा दर्जन घरों को छोड़कर अट्ठाइस टोला भी नदी समा गया। पछियारी टोला का अधिकांश हिस्सा कटाव का शिकार हो गया।

कटाव पीड़ित प्रभावित रहिवासी पीछे हटते रहे। अनेको ने अगल बगल में घर बना लिए। कुछ ने सोनपुर, हाजीपुर, पटना तो कुछ ने दियारे में ही मही नदी किनारे अपना घर बना लिया।वर्ष 2021 में भी पछियारी पंचायत में भीषण कटाव देखा गया। नाव की मदद से बालू की बोरियो की दीवार बनाकर कटाव रोकने की कोशिश की गयी थी। उस समय भीषण कटाव में पंचायत के नौघरवा टोला के लगभग दो दर्जन से अधिक घरों को क्षति पहुंची थी।

कटाव में सबलपुर पछियारी पंचायत के पूर्व मुखिया पारस राय, उपेन्द्र ठाकुर, नागेश्वर प्रसाद यादव सहित बड़ी संख्या में रहिवासी पीड़ित हुए थे और उनका घर गंगा में समा गया था। पछियारी टोला सरकारी मध्य विद्यालय का दक्षिण से अधिकांश हिस्सा कटाव में विलीन हो गया था। ज्ञात हो कि यहां जब भी कटाव शुरू होता है तब सरकारी स्तर पर शोरगुल मचना पर शुरू होता है। कटाव निरोधक कार्य को गति दिए जाने की समीक्षा की जाती है। पर, सबलपुर में जब से कटाव निरोधक कार्य आरंभ हुआ और सरकार ने जितनी राशि उस पर खर्च कर दी उतना में कई रिंग बांध बन जाता। कटाव के नाम पर अर्थ लुट भी नहीं होती।

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