माया में रहकर भी माया से निर्लिप्त रहना ही सच्ची शरणागति-जगद्गुरु लक्ष्मणाचार्य
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में चल रहे श्रावणी झूला महोत्सव के दूसरे दिन 25 अगस्त को भगवान श्रीगजेन्द्र मोक्ष का दिव्यामृत अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान को झूले पर विराजमान कराया गया।सुपौल एवं पटना से पधारे परम वैष्णव रतन कुमार कर्ण एवं नीलिमा कर्ण ने षोडशोपचार विधि से भगवान का पूजन कर झूला झुलाने की परंपरा का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्यजी महाराज ने भगवान के जन्म महोत्सव की झांकी का दिव्य श्रृंगार कर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भगवान हमेशा अवतार नहीं लेते, जब-जब धर्म का ह्रास होता है, तब-तब परमात्मा मानव लीला करते हैं। वे भक्तों और संतों को मोक्ष प्रदान कर आसुरी शक्तियों का संहार करते हैं। कहा कि कलयुग में भगवान अर्चावतार के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
उन्होंने कहा कि जो भक्त पूर्ण रूप से शरणागति को प्राप्त कर लेता है और माया में रहते हुए भी माया का दास नहीं बनता, उसे ही परमात्मा का साक्षात्कार होता है। कहा कि भक्त को कमल पत्र पर पड़े जल के समान रहना चाहिए। जैसे कमल के पत्ते पर जल नहीं ठहरता, वैसे ही जीव को माया में रहकर भी उससे पृथक रहना चाहिए, यही वास्तविक शरणागति है। कहा कि भगवान ने स्वयं कहा है कि मम माया दुरत्यया, अर्थात मेरी माया से पार होना चाहते हो तो मेरी शरण में रहो।

जगद्गुरू लक्ष्मणाचार्य ने कहा कि हमारे रामानुज सम्प्रदाय में द्वादश आलवार संत हुए, जिन्हें अपने जीवन में ही भगवान का साक्षात्कार हुआ। आलवार संतों की श्रेणी में ही भारत के महान मनीषी संत त्रिदण्डी स्वामीजी महाराज हुए, जिन्होंने हरिहरक्षेत्र को श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम के रूप में अमूल्य धरोहर प्रदान की। इस अवसर पर दिलीप झा, फूल देवी, मीरा सिंह, श्रीलाल पाठक, गायत्री शुक्ला, अनिल राय, सोहन राय, संतोष सिंह, माला सिंह, सरोज सिंह, नंदकिशोर तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे।
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