सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। झारखंड की राजधानी रांची के पुन्दाग स्थित शौर्य कुंज भवन मे तीज व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए की गई। दर्जनों महिलाएं एकजुट होकर माता पार्वती एवं भगवान शिव की अराधना की।
तीज व्रत कर रही महिलाओं ने 15 सितंबर को बताया कि इस पर्व का धार्मिक और पौराणिक महत्व है। शिव-पार्वती मिलन का तीज व्रत मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन और उनकी अटूट आस्था का प्रतीक है। कथा के अनुसार माता पार्वती की तपस्या के तहत भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए वनों में कठोर तपस्या की थी। इसी प्रसंग के कारण इसे हरतालिका’ (हरत यानी कि सखी द्वारा हरण कर ले जाना और आलिका यानी सखी) कहा जाता है।
आयोजित तीज पर्व में महिलाओं में विशेष हर्ष एवं उल्लास देखा गया। हरतालिका तीज व्रत सबसे कठिन निर्जला व्रतों (बिना भोजन और पानी के) में से एक है। हरतालिका तीज वास्तव मे प्रेम, उपवास और एकजुटता का त्योहार है। यह मानसून उत्सव के साथ गहरी प्रतीकात्मकता जुड़ी है। तीज का त्यौहार देवी पार्वती और भगवान शिव के मिलन को समर्पित त्यौहार है।
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