एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। देश के कई राज्य जलमग्न है। लाखों परिवार संकट में है। बिहार से ओडिशा तक बाढ़ में आमजन कराह रही है और भाजपाई प्रधानमंत्री के जन्मदिन का जश्न मना रहे है।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 17 सितंबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर देशभर में आयोजित किए जा रहे भव्य कार्यक्रमों और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित कई राज्यों के रहिवासी बाढ़ और भारी बारिश की मार झेल रहे हैं, तब सरकार को जश्न से ज्यादा बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी बचाने की चिंता करनी चाहिए।
नायक ने कहा कि बिहार में 15 जिलों के लगभग 49.36 लाख रहिवासी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। बिहार की राजधानी पटना सहित भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया जैसे जिले बाढ़ की चपेट में हैं। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
उन्होंने कहा कि असम में हर साल बाढ़ की गंभीर समस्या रहती है, जबकि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और अन्य पूर्वी राज्यों में भी बाढ़ और भारी बारिश का संकट छाया है। कहा कि बीते अगस्त माह में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में सैकड़ों गांवों के जलमग्न होने तथा लाखों रहिवासियों के प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई थी। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नायक ने सवाल किया कि एक तरफ घर डूब रहे हैं, किसान की फसल बर्बाद हो रही है, पशुधन बह रहा है और परिवार राहत की बाट जोह रहे हैं। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री के जन्मदिन को लेकर सरकारी तंत्र के जरिए उत्सव और प्रचार का माहौल बनाया जा रहा है।
क्या यही सरकार की प्राथमिकता है? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर सेवा के नाम पर होने वाले कार्यक्रमों में यदि सरकारी विभाग, सरकारी कर्मचारी अथवा सार्वजनिक धन का इस्तेमाल किया जा रहा है तो उसका पूरा हिसाब जनता के सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान के दौरान लगभग ₹13,820 करोड़ की परियोजनाओं के उद्घाटन/शिलान्यास की जानकारी दी है।
नायक ने कहा कि देश की जनता के टैक्स के पैसे से सत्ता का प्रचार और गरीब जनता के लिए राहत में कमी, यह दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल पर्याप्त राहत राशि दी जाए। कहा कि जिन किसानों की फसल नष्ट हुई है, उन्हें तत्काल फसल मुआवजा दिया जाए। जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त या बह गए हैं, उन्हें आवास एवं पुनर्वास सहायता मिले।
बाढ़ में मारे गए रहिवासियों के परिजनों को निर्धारित अनुग्रह राशि शीघ्र दी जाए। पशुधन गंवाने वाले गरीब परिवारों को विशेष सहायता दी जाए। बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित प्रभावित राज्यों के लिए केंद्र सरकार विशेष राहत पैकेज घोषित करे। प्रधानमंत्री के जन्मदिन और उससे जुड़े सरकारी कार्यक्रमों में खर्च की गई सरकारी राशि का विभागवार विवरण सार्वजनिक किया जाए।
नायक ने कहा कि प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाने पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि जब देश के लाखों रहिवासी प्राकृतिक आपदा में फंसे हों, तब सरकार की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए? दीप जलाने से ज्यादा जरूरी है बाढ़ में फंसे परिवार के घर में चूल्हा जलाना। प्रचार से ज्यादा जरूरी है किसान की बर्बाद फसल का मुआवजा देना और समारोह से ज्यादा जरूरी है बेघर परिवार को छत देना।
उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार को जन्मदिन के जश्न की चमक से बाहर निकलकर बाढ़ के पानी में खड़े उस गरीब किसान, मजदूर और परिवार को देखना चाहिए, जिसे आज फोटो, प्रचार और भाषण नहीं बल्कि राहत, भोजन, दवा और मुआवजे की सख्त जरूरत है।
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