अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। पूर्व मध्य रेलवे के हद में सोनपुर रेल मंडल के मंडलीय रेल चिकित्सालय के परिचारक युवा कार्टूनिस्ट एवं चित्रकार अजय कुमार ने महत्वपूर्ण थीमों पर कार्टून और चित्र बनाकर बहुत ही कम समय में रेल क्षेत्र में अपनी काबिलियत का बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उन्होंने गीत भी लिखा है और गीतों का संग्रह भी प्रकाशित किया है।
ज्ञात हो कि, कार्टूनिस्ट एवं चित्रकार अजय कुमार की प्रकाशित पुस्तकों में चुभते कार्टून, मैं तो मसीहा कहूंगा, गीत तेरे नाम एवं लिख रहा हूं गीत नए जमाने का शामिल है। उनके नाम उपलब्धियां भी हैं जिनमें सोनपुर में रेड रिबन ट्रेन के आगमन पर सोनपुर प्लेटफॉर्म पर उनके चित्रों की प्रदर्शनी। वर्ष 2012 में हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले के अवसर पर रेल ग्राम परिसर में उनके बनाए कार्टून और चित्रों की प्रदर्शनी, वर्ष 2012 से 2019 तक रेल ग्राम में बनाए गए चित्रों की प्रदर्शनी जिसका उद्घाटन कभी डीआरएम, कभी जीएम द्वारा किया गया।
वर्ष 2025 के सोनपुर मेले में पुनः समृद्ध रेल, समृद्ध भारत थीम पर उनके द्वारा बनाए गए चित्र की प्रदर्शनी लगी, जिसकी सराहना सीएमएस डॉ शैलेश कुमार, मंडल रेल प्रबंधक अमित सरन और पूर्व मध्य रेल के जीएम छत्रशाल सिंह द्वारा की गयी। अच्छे कार्य और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें सीएमएस द्वारा सीएमडी अवॉर्ड से पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त डीआरएम अवॉर्ड से भी उन्हें सम्मानित किया गया।
इस संबंध में अजय का कहना है कि इधर अपनी सेवा के दायित्व निभाने के बाद जो खाली समय बचता है, उसी में अपनी कला साधना को गति देता हूं। कार्टून और चित्रों के अलावा गीत लिखना मेरी कला साधना का महत्वपूर्ण अंग बन चुका है। बताया कि अब तक लगभग दो सौ गीत लिख चुका हूं और लिखना जारी है। बताया कि मशहूर फिल्म अभिनेता सोनू सूद ने मुंबई में मेरी एक पुस्तक को काफी पसंद किया और अपने फैंस के बीच मेरी पुस्तक हाथ में लेकर सबको दिखाया। बॉलीवुड के कई कलाकारों ने मेरी कला साधना को सराहा है। बॉलीवुड सिंगर प्रिया मल्लिक ने मेरे गीतों को पसंद किया है। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि भविष्य में वे मेरे कुछ गीतों को अपना स्वर जरूर देंगी। मुझे यह भी विश्वास है कि आज नही तो कल, फिल्मों में मेरे गीत भी स्थान पायेंगे। इस दिशा में मेरा प्रयास जारी है और मैं लगातार नए जमाने के अनुकूल गीत लिखता जा रहा हूं।
मेरे गीत में जमाने की तस्वीर
कार्टूनिस्ट अजय कहते हैं कि अपनी रचना की खुद प्रशंसा नहीं की जाती, किन्तु मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि आत्मा की गहराइयों में डूबकर मैं वर्तमान जमाने के हर रंग, हर सच, नई पीढ़ी के उत्साह, उसकी कामनाएं और उसकी रंगीनियों को शब्द देने की कोशिश जरूर करता हूं। प्रेम मेरे गीतों का मूल तत्व है। कहा कि मैं मानता हूं प्रेम के बिना इस संसार का कोई अर्थ नहीं। ये चांद-तारे, प्रकृति के सारे अंग, हम और आप – सभी के सभी प्रेम के आकर्षण में थे, हैं इसीलिए टीके है। जिस दिन यह आकर्षण टूट जायेगा, उस दिन महा प्रलय आ जायेगी। यही कारण है कि मैं प्रेम तत्व को विशेष महत्व देता हूं।प्रेम ही इस समूची सृष्टि में व्याप्त है।
इसके साथ ही मैं जो गीत लिखता हूं, उसे आज नहीं तो कल फिल्म वाले जरूर लेंगे। कहा कि मैं गीतों में लय का ज़्यादा ख्याल रखता हूं। इस लिए गीत लिखने के बाद उसे खूब गाकर उसकी लय को माप लेता हूं। लय में जहां कभी कोई कमी दिखाई देती है, शब्द को बदल कर उस कमी को दूर कर देता हूं।
अजय ने बताया कि मैंने जितने गीत लिखें, वे सबके सब अच्छे, हृदय को छूने वाले और फिल्मों में चलने लायक हैं। कई रिलीज़ होने वाले फिल्मों के पोस्टर देखकर भी उनपर गीत लिखें, जसकी सराहना कई फिल्मी हस्तियों ने की। जरा देखिए जरा सा छुआ तेरी अदा को, खिल गया चेहरा गुलाबों की तरह ……तुम्हें मैं इतना एक बार और कहूं, एक बार नहीं सौ बार कहूं कि मुझे तुमसे हुआ प्यार यही हर बार कहूं…….मरना वतन के लिए, यही हमारा ईमान है, तुम शान से तिरंगा लहराओ, आंसू ना गिराना, यही वतन की शान है, तुम शान की शौकत में, यही हमारी शान होगी …..। बताया कि हमने अपनी कला साधना की शुरुआत कार्टून और चित्रों से की। मेरे कार्टून खास कर रेलवे में खूब सराहे गए।
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