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करगली में जस्ट ट्रांजिशन और इकोनॉमिक डाइवर्सिफिकेशन पर कार्यशाला

कार्यशाला में कोयला क्षेत्रों के भविष्य पर मंथन

एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में सीसीएल बीएंडके एरिया करगली ऑफिसर क्लब में 7 मई को डिजिटल एंपावरमेंट फाउंडेशन और स्वनीति इनिशिएटिव के तत्वावधान में जस्ट ट्रांजिशन और इकोनॉमिक डाइवर्सिफिकेशन पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।

आयोजित कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बोकारो जिले में कोयला पर निर्भरता को समझना और कोयला आधारित उद्योगों में आर्थिक विविधीकरण के लिए वैकल्पिक रोजगार के अवसरों की तलाश करना था। कार्यशाला में ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों, स्थानीय रहिवासियों और विशेषज्ञों सहित विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया और अपने विचार साझा किए।

इस दौरान, कोयला उद्योग के भविष्य और इससे प्रभावित होने वाले समुदायों की आजीविका से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए।कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए स्वनीति इनिशिएटिव के फेलो ऋषि किशोर ने बोकारो जिले में किए गये अध्ययन के परिणामो को पीपीटी द्वारा प्रेजेंटेशन किया।

इसके बाद बीएंडके एरिया के जीएम (ऑपरेशन) के. एस. गैवाल ने स्वनीति के अध्ययन रिपोर्ट एवं कार्यशाला आयोजन पर हर्ष प्रकट करते हुए कहा जस्ट ट्रांजीशन आज का ज्वलंत मुद्दा है। यह कोयला क्षेत्रों के भविष्य से जुड़ा है। एरिया वित्त महाप्रबंधक ज्ञानेंदु चौबे ने कोयला बंदी से वित्तीय प्रभावों और सीएसआर फंड के उपयोग पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने सीएसआर प्रशिक्षणों की क्षणिक प्रकृति और वैकल्पिक ऊर्जा की ओर बढ़ने की प्रक्रिया में लगने वाले समय की बात कही। उन्होंने स्थानीय स्वरोजगार में स्वयं सहायता समूहों और संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

एटक नेता लखन लाल महतो ने कोयला खदानें बंद होने की स्थिति में पेंशन की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। बीएमएस के रविन्द्र मिश्रा ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत दिए जाने वाले प्रशिक्षणों के बंद होने और आउटसोर्सिंग कंपनियों के कारण स्थानीय रहिवासियों के पलायन और दुर्घटनाओं का शिकार होने का मुद्दा उठाया। इंटक के श्यामल सरकार ने झारखंड में 71 कोयला खदानों और सीसीएल में कार्यरत 32,000 कर्मचारियों का उल्लेख करते हुए ऊर्जा संक्रमण के संभावित प्रभावों पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला को जमसं के ओमप्रकाश सिंह उर्फ टीनू सिंह, विकास सिंह, ओम शंकर सिंह, एटक के सुजीत घोष, चन्द्रशेखर झा, सीटू के पंकज महतो ने भी संबोधित किया।
कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि कोयला क्षेत्रों में जस्ट ट्रांजिशन को सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करने और दीर्घकालिक रणनीतियाँ तैयार करने की आवश्यकता है। कार्यशाला में सीसीएल बीएंडके एरिया के कई अधिकारी, कर्मचारी सचिन सिंह रोशन सिंह कि ओर स्वनीति से सत्येंद्र कुमार, अंजना, दीक्षा पांडेय, भैया साहेब, डीईएफ अंजर रजा, मैत्री सिंह, सुरेश राम आदि उपस्थित थे।

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