एस.पी.सक्सेना/बोकारो। मौजूदा मतलबी दौर में सीसीएल प्रबंधन (CCL management) कम से कम देश के नफा नुकसान का ख्याल रखती है। जब शोषित पीड़ित मजदूर समस्याओं से घिरकर बाध्य होकर आंदोलन की नोटिस प्रबंधन को थमाती है।
तभी प्रबंधन को देश हित की याद आने लगती है। उक्त बातें असंगठित मजदूर कांग्रेस (Congress) के बोकारो जिला महामंत्री संतोष कुमार आस ने 11 फरवरी को एक विशेष भेंट में कही।
उन्होंने कहा कि यह कपोल कल्पित घटना नहीं, बल्कि प्रमाणित सत्य है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन की गलत नीति के कारण अन्याय पूर्ण तरीके से लगभग एक दशक से कोयला उद्योग में रोजी रोजगार कमा रहे बोकारो जिला (Bokaro district) के तीनों कोयला क्षेत्र के हजारों असंगठित मजदूरों ने अपनी रोजी-रोटी पाने और विस्थापित अपने हक और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रबंधन के टालमटोल नीति के खिलाफ पांच सूत्री लंबित मांगों पर जब जब आंदोलन की सूचना प्रबंधन को दिया, आदि।
तब तब प्रबंधन आंदोलन को टालने के लिए देश हित और कोयला उद्योग बचाने की बातें कहती रही। आस ने कहा कि प्रबंधन बार-बार अपना रटा रटाया जुमला मजदूर के बीच रखती रही है। उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग की सुधि लेने वाला कोई नहीं है।
खास बात यह है कि जब भी प्रबंधन को आंदोलन का नोटिस थमाया जाता है, तो प्रबंधन द्वारा देश में ऊर्जा संकट और कोयले की कमी का राग अलापा जाता रहा है। ऐसे में न्याय कैसे मिलेगा या यक्ष प्रश्न है।आस ने बताया कि बेरमो कोयलांचल के काथारा क्षेत्र में बीते 20 वर्षों से सुरक्षा विभाग में तैनात लगभग 200 निजी सुरक्षा गार्डों को पांच वर्ष पूर्व काम से हटाकर पूरी तरह बेरोजगार कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि इन निजी सुरक्षा गार्डों के बदौलत सीसीएल प्रबंधन को प्रतिवर्ष कोयला, लोहा, डीजल, तांबा तथा मशीनों के कीमती पुर्जो की धडल्ले से हो रही चोरी पर काफी हद तक अंकुश लगा था।
जिससे कंपनी को प्रतिवर्ष करोड़ों की बचत होती थी। बावजूद इसके डीजीआर का हवाला देते हुए प्रबंधन ने आसपास के सैकड़ों बेरोजगार जो निजी सुरक्षा गार्ड, क्लीनिंग मजदूर तथा कोयला ढुलाई में यत्र तत्र रोजगार प्राप्त थे, उन्हें पूरी तरह से बेरोजगार बना दिया गया।
ऐसे में प्रबंधन की सीएसआर (CSR) योजना और बेरोजगारी दूर भगाने का प्रयास खोखले दावे के अलावा और कुछ नहीं दिखता। जिला महामंत्री आस के अनुसार क्षेत्र में बढ़ रही बेरोजगारों की संख्या और नियोजन में कमी कहीं यह सरकार तथा प्रबंधन की मंशा को नहीं दर्शाता कि बेरोजगार मरे इससे सरकार (Government) के सेहत पर कोई फर्क पड़नेवाली नहीं है।
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