सोनपुर स्टेशन गेट के निकट अवस्थित है नर्मदेश्वर महादेव मंदिर
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर स्टेशन गेट के पास बरबट्टा गांव का सुप्रसिद्ध नर्मदेश्वर महादेव मंदिर अवस्थित है। बरबट्टा में अवस्थित होने के कारण इसे रहिवासी बरबटेश्वर महादेव मंदिर भी कहते हैं। सावन में पूरे महीने इस मंदिर में रौनक रहती है।
सावन माह में पहलेजा घाट धाम से कांवर में गंगा जल लेकर इस रास्ते से गुजरने वाले कांवरियों का जत्था इस मंदिर में भी आकर भगवान नर्मदेश्वर महादेव की पूजन-अर्चन करते है। स्थानीय भक्त तो यहां प्रतिदिन जलाभिषेक और पूजा करते हैं। प्रत्येक सोमवार को इस मंदिर पर शिवभक्तों का मेला लगा रहता है। यहां महाशिवरात्रि पर्व पर विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
श्वेत या सफेद शिवलिंग है यहां स्थापित
हरिहरक्षेत्र सोनपुर को हरि और हर की भूमि कहा गया है। यहां के कोने-कोने में भगवान का देव स्थल विराजमान हैं। इसी पावन भूमि में उक्त नर्मदेश्वर महादेव मंदिर भी अवस्थित है। यह भी सोनपुर के जीवंत मंदिरों में से एक है। सोनपुर स्टेशन गेट एवं आरपीएफ बैरक के पास स्थित मंदिर में दुधिया श्वेत रंग का शिवलिंग विराजमान है। जिसके दर्शनार्थ श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहता है।
नर्मदेश्वर शिव लिंग वह भी श्वेत या सफेद हो अथवा बर्फ की तरह हो, उसके बारे में कहा जाता है कि वह हमें कई तरह के भय से बचाता है। कहते हैं कि नर्मदेश्वर शिवलिंग के वास स्थान से काल और यम का भय दूर रहता है। शिव पूजा में शिवलिंग की महत्ता को देखते हुए इसे घर और मंदिर दोनों जगहों पर स्थापित किया जाता है। इसे इन दोनों जगहों पर स्थापित करने के अलग- अलग नियम हैं। घर में अंगूठे की लम्बाई के बराबर का शिवलिंग स्थापित करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

शिवलिंग सुन्दर वर्तुलाकार (गोलाकार) पकी जामुन या मुर्गी के अंडे या कमलगट्टे की शक्ल के अनुरूप होना चाहिए। यह सफेद, नीला और शहद के रंग का होता है। नर्मदेश्वर शिवलिंग को वेदी (जलहरी) पर स्थापित कर पूजा किया जाता है। नर्मदेश्वर शिवलिंग की पहचान करने के लिए यह देखना चाहिए कि यह संगमरमर की तरह चमकदार, साफ, छिद्र रहित व ठोस हो। प्राकृतिक रूप से बने यह शिवलिंग आपको भारी प्रतीत होते हैं। यह अक्सर छोटे रूपों में पाए जाते हैं। नर्मदेश्वर शिव लिंग लाल, सफेद, हरा, पीला और स्वयंभू होते हैं।
नर्मदेश्वर शिवलिंग का क्या महत्व है
नर्मदा नदी के शिवलिंग को सीधा ही स्थापित किया जा सकता है। इसके प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती है। कहा जाता है कि जहां नर्मदेश्वर का वास होता है, वहां काल और यम का भय नहीं होता है। व्यक्ति समस्त सुखों का भोग करता हुआ शिवलोक तक जाता है। नर्मदेश्वर शिवलिंग के बारे में बुनियादी जानकारी यही है कि यह भारत के मध्य प्रदेश में मौजूद नर्मदा नदी में पाया जाता है।
मंदिर परिसर में हैं राधा-कृष्ण एवं सीता-राम की मूर्ति
इस मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण, सीता-राम एवं हनुमान जी की अलग-अलग मंडपों में मूर्ति स्थापित है। यहां पौराणिक दुर्गा स्थान भी है। एक तरह से कहा जा सकता है कि यह मंदिर सभी हिन्दू देवी-देवताओं का समन्वय स्थल है, कहना गलत नहीं होगा। स्टेशन गेट के निकट होने के कारण अवसर मिलने पर रेल यात्री भी आकर ईश्वर दर्शन का लाभ उठाने से नहीं चुकते।
बरबट्टा गांव व् रेलवे कॉलोनी में रहनेवाले भक्तगण प्रतिदिन निश्चित रुप से सुबह-सबेरे दर्शन-पूजन करने आते हैं। यहां के पुजारी जयराम हैं। जिनके द्वारा भगवान एवं समस्त देवी-देवताओं का पूजन-अर्चन विधि-विधान के साथ होता है, जबकि आरंभिक समय से ही मंदिर की व्यवस्था, दुर्गा पूजा कमिटी आदि में महत्त्वपूर्ण भागीदारी निभाने वाले भक्तों में स्थानीय रहिवासी सुधीर राय,आदि।
अजय सिंह एवं जितेन्द्र सिंह बताते हैं कि सावन माह में बाबा नर्मदेश्वर नाथ की पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक की पूरी तैयारी हो चुकी है। पवित्र भाव से यहां समर्पण करने वाले भक्तों की सभी मनोवांछित कामनाएं यहां पूर्ण होती हैं।
जन्माष्टमी के अवसर पर लगता है मेला
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर धूमधाम से जन्माष्टमी महोत्सव मनाया जाता है। सड़क किनारे दोनों तरफ ठेले-खोमचेवालों की दुकानें सज जाती हैं। इससे पूर्व यह महोत्सव आरपीएफ बैरक में रेलवे सुरक्षा बल के जवानों द्वारा किए जाने की पुरानी परिपाटी थी। छह दिनों तक यहां कार्यक्रम चलता था।
भगवान श्रीकृष्ण जन्म से लेकर महाप्रयाण तक उनकी झांकी प्रदर्शित होती थी। सोनपुर रेल मंडल के डीआरएम इसका विधिवत उद्घाटन करते थे, परंतु बाद के दिनों में आरपीएफ द्वारा यह आयोजन बंद कर दिया गया। तब से यह मंदिर परिसर में ही होता है, जो आरपीएफ बैरक के पास ही अवस्थित है। दुर्गा पूजा का भी यहां भव्य आयोजन होता है।
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