गंगापुर व् महुआटांड़ में दो व् बड़की पुनू में तीन की हत्या के बाद भी सरकार मौन
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बीते 5 फरवरी की रात बोकारो जिला के हद में गंगापुर के महुआटांड़ गांव में हाथी के हमले में दो रहिवासियों की जान चली गई। इससे भी ज्यादा डरावनी सच्चाई यह है कि यह मौतें प्रशासनिक लापरवाही और सरकार की उदासीनता का नतीजा है। इससे ठीक एक दिन पहले बड़की पुनू गांव में हाथियों ने तीन रहिवासियों को कुचल दिया था। पांच मौतें, लेकिन न सरकार जागी और न ही वन विभाग हरकत में आया।
बोकारो जिले के जंगल के रहिवासियों की लगातार हो रही उक्त घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि जंगल से सटे गांवों के रहिवासी आज अपने ही घरों में मौत के साये में जीने को मजबूर हैं, जबकि सरकार सिर्फ कागजी योजनाओं और खोखले दावों में उलझी है।
केंद्रीय वन बचाव समिति के उपाध्यक्ष विष्णु चरण महतो ने 7 फरवरी को सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि रहिवासियों को हाथी नहीं, सरकार की नाकामी जान ले रही है। कहा कि जब एक के बाद एक गांव में रहिवासी मारे जा रहे हैं, तब भी सरकार गंभीर नहीं है। वन विभाग सिर्फ हादसे के बाद खानापूर्ति करता है। आखिर कब तक गरीब ग्रामीण अपनी जान देकर सरकार की संवेदनहीनता का सबूत देते रहेंगे?
उन्होंने कहा कि हाथियों का जंगल से गांव में आना इस बात का प्रमाण है कि वन प्रबंधन पूरी तरह फेल हो चुका है। जंगल उजाड़े गए, कॉरिडोर खत्म किए गए और अब उसका खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। केंद्रीय उपाध्यक्ष महतो ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द ही हाथियों की आवाजाही रोकने के लिए ठोस योजना नहीं बनाई गई, तो केंद्रीय वन बचाव समिति सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी। अब यह सिर्फ वन्यजीव का मुद्दा नहीं, बल्कि आम जनों के जीवन और सुरक्षा का सवाल है।
रहिवासी ग्रामीणों का कहना है कि हर मौत के बाद मुआवजे की घोषणा कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है, जबकि जरूरत स्थायी समाधान की है। कहा कि सवाल साफ है कि क्या सरकार किसी बड़े आंदोलन या और मौतों के बाद ही जागेगी?
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