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विकास मंच द्वारा जुलूस निकालकर बंद चीनी मिल को चालू करने की मांग

अंग्रेज सरकार ने समस्तीपुर में 1917 में स्थापित की थी चीनी मिल, आज बंद

मिल चलाने हेतु पर्याप्त जमीन, सड़क- विधुत- रेल सुविधा व् सस्ता श्रमिक उपलब्ध

एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। समस्तीपुर का बंद चीनी मिल को चालू करने की मांग को लेकर जिला विकास मंच के बैनर तले 22 फरवरी को नागरिक मार्च निकालकर चीनी मिल चौक पर सभा किया गया।

समस्तीपुर जिला विकास मंच से जुड़े बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शहर के सरकारी बस स्टैंड में इकट्ठा होकर बंद समस्तीपुर के चीनी मिल को चालू करो का नारा लगाते नागरिक मार्च निकाला। जिला मुख्यालय का भ्रमण करते हुए मार्च ओवर ब्रीज के रास्ते पुनः चीनी मिल चौक पहुंचा, जहां मिल को चालू करने से संबंधित जोरदार नारेबाजी मार्च सभा में तब्दील हो गया।

सभा की अध्यक्षता मंच के संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी ने किया। सभा को शंकर साह, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राकेश ठाकुर, उपेंद्र राय, राम विनोद पासवान, पिंकू पासवान, संतोष कुमार निराला, विश्वनाथ सिंह हजारी, शाहीद हुसैन, सुशील कुमार राय, रवि आनंद, जितेंद्र कुमार, जगलाल राय, शंभू राय, मनोज राय आदि ने संबोधित किया।

मौके पर सभा को संबोधित करते हुए मंच के वरीय सदस्य सह सेवानिवृत्त शिक्षक शंकर साह ने कहा कि अंग्रेज जमाने में चालू किया गया समस्तीपुर चीनी मिल वर्षों से बंद पड़ा है। यह मिल प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवार का रोजी-रोटी, भरण-पोषण का साधन था। आज भी चीनी मिल के पास पर्याप्त जमीन है। यहां चौतरफा आवागमन का साधन है। विधुत एवं रेल सुविधा समेत सस्ते श्रमिक उपलब्ध हैं। कम खर्च में सरकार इसे आसानी से चालू कर सकती है।
राजद नेता राकेश ठाकुर एवं भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बंद चीनी मिल को चालू कराने को सभी राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, छात्र-नौजवानों, मजदूर-किसान, व्यवसायीयों से संघर्ष तेज करने की अपील की।

विदित हो कि समस्तीपुर चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1917 में अंग्रेज सरकार द्वारा की गई थी। यह मिल शुरू में अच्छी तरह से चल रही थी, लेकिन वर्ष 1995 में इसे बंद कर दिया गया था। इसके बाद से मिल को फिर से चालू करने के कई प्रयास किए गये, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है।

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