जाली हुकुमनामा से फर्जी बंदोबस्त व् सरकारी जमीन बेचने का आरोप
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। भारत माला सड़क निर्माण परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होते ही बोकारो जिला के हद में कसमार व् चास प्रखंड के कई गांवों में गैर मजरूआ जमीन (सरकारी भूमि) की पोल परत दर परत खुलने लगा है। जांच में पता चला है कि जिन जमीनों पर रहिवासियों द्वारा मुआवजा का दावा किया गया है, वह असल में सरकारी भूमि है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित जमीन का रेकॉर्ड जिला अभिलेखागार में स्पष्ट रूप से सरकारी (गैर मजरूआ आम) के रूप में दर्ज है। इसके बावजूद जाली हुकुमनामा और फर्जी दस्तावेज़ बनाकर कुछ भू-माफियाओं ने उक्त जमीन को निजी नाम पर बंदोबस्त करा लिया और बाद में उसे बेच भी दिया।
बताया जा रहा है कि इस खेल में राजस्व विभाग के कुछ कर्मियों, हल्का कर्मचारियों, अंचल कार्यालय कर्मियों और स्थानीय दलालों की मिलीभगत से फर्जी कागजात तैयार किए गए। अब जब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई और सर्वे का कार्य हुआ, तो इन फर्जीवाड़ों की परतें खुलनी शुरू हो गई। अगर इस तरह कि जांच सही रुप से किया जाए तो बोकारो जिले के सभी अंचल क्षेत्र में गैर मजरुआ जमीन का फर्जी हुकुमनामा से बंदोबस्त किया गया है। विशेष कर जिला के हद में चास अंचल में जमीन की बड़े पैमाने पर हेरा फेरी किया गया है। इतना ही नहीं वन भूमि को भी जमीन माफिया फर्जी कागजात बना कर बेच डाला है।
इस बावत स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि राज्य सरकार और जिला शासन पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराए तथा सरकारी जमीन को बचाया जाए। साथ ही, फर्जी तरीके से मुआवजा पाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
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