मिरारोड वॉक्खार्ट अस्पताल का अनोखा उपक्रम

  • कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत नागरिकों को सीपीआर प्रशिक्षण
  • इस अभियान के माध्यम से 1 लाख नागरीकों को प्रशिक्षण देने का रूग्णालय का प्रयास

प्रहरी संवाददाता/ मिरारोड। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हार्ट अटैक के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कई बार हृदयक्रिया अचानक बंद होने के कारण मौत होती है। युवकों में दिल का दौरा पड़ने के मामले बढते दिखाई दे रहे हैं। आपात स्थिति में अस्पताल ले जाने तक मरीजों की जान कैसे बचाई जाए।

इसलिए नागरिकों को कोविड-19 टीकाकरण अभियान के तहत मीरा रोड के वॉक्खार्ट अस्पताल में सीपीआर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रकार टिकाकरण मोहिम के दौरान नागरीकों को वैद्यकीय आपत्ती दौरान कैसे सीपीआर देके मरीज को उपचार मिलने तक राहत दे सकते है इसका प्रशिक्षण 1 लाख लोगों को जागृक करने का प्रयास है।

कार्डियोपल्मोनरी पुनर्जीवन (CPR ) एक आपातकालीन प्रक्रिया है, जो सीने के संकुचन को अक्सर कृत्रिम वेंटिलेशन के साथ जोड़ती है। सीपीआर का उद्देश्य मस्तिष्क और हृदय के उत्तकों को बचाए रखने के लिए रक्त और ऑक्सिजन का प्रवाह बनाए रखना होता है। रेस्ट से पीड़ित व्यक्ति में श्वास और सहज रक्त परिसंचरण बहाल न हो जाए। सीपीआर तब दिया जाता है जब किसी का दिल रुक जाता है या पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने में विफल हो जाता है।

यह बहुत सी आपात स्थितियों में मददगार होता है जैसे कार्डियक अरेस्ट, दम घुटना, डुबने, बिजली के झटके आदी के कारण सांस रूक जाती है। ऐसी स्थिती में सीपीआर दिया जाता है। सीपीआर देने में डरे नहीं और जितनी जल्दी हो सके शुरू करें क्योंकि पहले कुछ सेकंड से लेकर 10 मिनट तक का समय बेहद जोखिम भरा होता है।

मिरारोड वॉक्हार्ट अस्पताल के कंसल्टेंट इमरजेंसी मेडिसिन डॉ. तुशाऊ प्रसाद ने कहा की, जब किसी भी करीब व्यक्ती को हार्ट अटैक आता है तो हर सेकंड काफी मायने रखता है। कार्डियक अरेस्ट कभी भी और कहीं भी हो सकता है। यहां तक की कोई ऐसा व्यक्ती जिने आप जानते हो उन्हें भी कार्डियक अरेस्ट समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिती में कई बार मरीज को अस्पताल दाखिल करके इलाज शुरू होने तक मरीज की मौत हो जाती है।

इसलिए अस्पताल पहुंचने तक मरीज की जान बचाने के लिए सीपीआर देना काफी जरूरी है। यह सीपीआर क्या है इस बारे में लोगों को जानकारी होनी बहोत जरूरी है। ताकि हम आपने परीजनों की जान बचा सकते है। हर मिनट सीपीआर में देरी होने पर पीड़ित के बचने की संभावना 10% कम हो जाती है। आस-पास के किसी व्यक्ति का तत्काल सीपीआर उनके जीवित रहने की संभावना को दोगुना-यहां तक कि तिगुना कर सकता है।

डॉ. प्रसाद ने आगे कहा की, यह सोचकर कोविड-19 लसीकरण अभियान द्वारा लोगों को सीपीआर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रदर्शन सीपीआर में देरी के कारण होने वाली जटिलताओं को रोकने में मदद करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि मरीज सुरक्षित अस्पताल पहुंचे। प्रतिभागियों को अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होने के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र भी दिया गया।

वॉक्हार्ट अस्पताल के सेंटर हेड डॉ. पंकज धमीजा ने कहा की, सीपीआर की प्रभावी प्रथमोपचार है जिसके तहेत मरीज की प्राण बचाई जा सकती है। लेकिन यह सीपीआर सही तरह से लेना जरूरी है। इसलिए कोविड-19 लसीकरण अभियान द्वारा ऑक्सिजन देने के लिए आनेवाले लोगों की सीपीआर किस तरह से दिया जाता है इसका प्रशिक्षण दिया गया है। हमारे विशेषज्ञों द्वारा एक दिन में 900 से अधिक वैक्सीन लाभार्थियों को हैंड्स ओनली सीपीआर प्रदर्शन दिया गया।

ऑक्सिजन लाभार्थी प्रज्ञा शिंदे ने कहा की, स्कूलों और कॉलेजों में भी हैंड ओनली सीपीआर प्रदर्शन देना चाहिए। लोगों की जान किस तरह से बचाई जा सके इसलिए वॉक्हार्ट अस्पताल ने शुरू किए अभियान के लिए में धन्यवाद देती हूं। इस अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना चाहिए। ऐसे अभियान लोगों को स्वास्थ्य जीवन जीने में मददगार साबित होंगे।

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