एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। केवल लोक परीक्षा कानून-2024 (एंटी पेपर लीक कानून) लागू कर भाजपा की केंद्र सरकार अपनी नाकामी नहीं छुपा सकती है। देश के शिक्षा मंत्री को छात्रों से माफी मांगनी चाहिए और तत्काल नीट की परीक्षा को रद्द कर सीबीआई से जांच कराकर दोषियों को सजा दिलाने का प्रयास करना चाहिए।
उपरोक्त बातें संपूर्ण भारत क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सह झारखंड-छत्तीसगढ़ प्रभारी विजय शंकर नायक ने लोक परीक्षा कानून-2024 (एंटी पेपर लीक कानून) लागू करने पर 22 जून को प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही।
नायक ने कहा कि देश में बीते 21 जून को केंद्र की भाजपा सरकार ने एंटी पेपर लीक कानून की अधिसूचना जारी कर अपनी सरकार में किए गए पापों को धोना चाहती है। अपने नाकामियों को इस कानून को लागू कर छुपाना चाहती है।
उन्होंने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी आज भ्रष्ट लोगों का अड्डा एवं पेपर लीक करने वाले कोचिंग माफियाओं तथा शिक्षा माफिया का अड्डा बन गया है।शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है। केंद्र की सरकार छात्रों के साथ बहुत बड़ा जुर्म कर रही है। उन्होंने कहा कि एक छात्र किसी भी परीक्षा की तैयारी करने के लिए दिन रात मेहनत करता है। ना वह दिन देखता है, ना रात।
लगातार अध्ययन में लीन रहता है। वैसे छात्रों के साथ परीक्षा के समय पेपर लिक होना बहुत बड़ा मजाक तो है ही, उनके भविष्य को भी समाप्त करने की दिशा में यह कदम है, जिसे कदापि बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
नायक ने कहा कि पेपर लिक होने से खासकर देश के लाखो गरीब छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्होंने कहा कि आज नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा का निजीकरण किया जा रहा है। जितने भी सरकारी शिक्षा के मंदिर हैं, सबको ध्वस्त कर समाप्त करने की दिशा में भारतीय जनता पार्टी काम कर रही है।
आज छात्रों को स्कॉलर और फेलोसिप नहीं मिल रहा है, जिसके कारण गरीब छात्र आज शिक्षा से मरहूम होते जा रहे हैं। आज कोचिंग तथा शिक्षा माफिया संपूर्ण देश में हावी होता जा रहा है। जबकि, केंद्र की सरकार मुक दर्शक बनी हुई है। जिस कारण गरीब मेधावी छात्रो का भविष्य बर्बाद हो रहा है।
नायक ने तल्ख़ लहजे में कहा कि आज कोचिंग माफियाओं एंव शिक्षा माफियाओं पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। वैसे तत्वों पर अंकुश लगाने के लिए भारत सरकार एक कानून बनाए, ताकि कोचिंग माफिया एवं शिक्षा माफियाओं की मनमानी नहीं चल सके।
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