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महनार विधानसभा क्षेत्र में दो निर्दलीय दे रहे महागठबंधन और राजग को चुनौती

गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर वैशाली जिले के आठ विधानसभा क्षेत्र में 6 नवंबर को मतदान होगा।

जिला के हद में महनार विधानसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार उमेश सिंह कुशवाहा और महागठबंधन के उम्मीदवार राजद के इंजीनियर रविंद्र सिंह के अलावे कुल 18 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है। लेकिन मुख्य मुकाबला जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा और राजद के इंजीनियर रविंद्र कुमार सिंह, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी पूर्व विधायक अच्युतानंद, जन शक्ति जनता दल तेज प्रताप यादव की पार्टी के उम्मीदवार जय सिंह राठौड़, निर्दलीय प्रत्याशी संजय कुमार राय और सलहा पंचायत के मुखिया विपिन कुमार राय उर्फ विपिन सर के बीच है।

बिहार में विधानसभा चुनाव जातीय गोलबंदी और लालू विरोध व् लालू समर्थन के बीच में लड़ी जा रही है। महनार विधानसभा क्षेत्र में राजपूत, यादव, पासवान और कुशवाहा मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक बताई जाती है। पूर्व के चुनाव भी इन्हीं जातीय गोलबंदी के आधार पर होते आए हैं।
ज्ञात हो कि जदयू के प्रत्याशी उमेश सिंह कुशवाहा इस विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2015 में विधायक चुने गए, लेकिन वर्ष 2020 के चुनाव में यहां से बाहुबली रामा सिंह की पत्नी बीणा सिंह जो राजद की उम्मीदवार थी से चुनाव हार गए।

गत् 2020 विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी एनडीए का हिस्सा नहीं थी और पूरे बिहार में जहां-जहां जदयू के प्रत्याशी थे, वहां अपना उम्मीदवार उतारा। 2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान की लोजपा की ओर से रविंद्र कुमार सिंह प्रत्याशी थे, जिन्हे 31000 से अधिक मत प्राप्त हुआ था और उमेश सिंह कुशवाहा लगभग 7000 वोट से चुनाव हार गए।

लेकिन इस बार चिराग पासवान की पार्टी एनडीए का हिस्सा है और कुशवाहा इस बार एनडीए समर्थित उम्मीदवार हैं। क्षेत्र के मतदाताओं का अनुमान है कि लोजपा चिराग के वोट पासवान व् यादव के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेगा। इस क्षेत्र से राजद के उम्मीदवार राजपूत बिरादरी से आते हैं। जिनके बिरादरी के पूर्व विधायक अच्युतानंद और जय सिंह राठौड़ भी चुनाव मैदान में है। जिस वजह से यहां राजपूत बिरादरी के मत का बिखराव होगा।

महागठबंधन के पास का वोट यादव और मुस्लिम समाज है। इस क्षेत्र में मुस्लिम आबादी बहुत ही कम है और यादव समुदाय से राजद के ही स्थानीय नेता संजय कुमार राय निर्दलीय उम्मीदवार हैं। साथ ही सलहा पंचायत के मुखिया विपिन कुमार राय उर्फ विपिन सर भी निर्दलीय प्रत्याशी हैं, जिनका अपने समुदाय में काफी अच्छा प्रभाव है। यानी महनार विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन का वोट में बिखराव है, जबकि लालू विरोधी मत एक मुस्त अजय कुशवाहा को जाएगा, जिससे उनके बिजयी होने की संभावना काफी प्रबल है।

महनार विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी विपिन कुमार राय उर्फ विपिन सर एक सामान्य परिवार से आते हैं, लेकिन शिक्षा के बल पर उन्होंने एक अलग पहचान बनाई है। मठ मस्ती नाम से यूट्यूब पर वीडियो बनाकर खेल खेल में मैट्रिक से इंटर के विद्यार्थियों साथ ही प्रतियोगी विद्यार्थियों को वे पढ़ाने का काम करते हैं। इनके 6 मिलियन सब्सक्राइबर हैं, जिससे इनको लाखों की कमाई होती है। इसके अलावे विपिन सर स्थानीय छात्रों को भी मुफ्त में शिक्षा देते हैं। साथ ही विपिन सर सलहा पंचायत के मुखिया है। वे यहां करप्शन, भोजपुरी, कानून व्यवस्था और शिक्षा पर ज्यादा जोर देते हैं।

पटना के चर्चित प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले खान सर इनके मित्र है। अपने क्षेत्र में इनका प्रचार अनोखे ढंग से चल रहा है तथा जनता भी उनकी बात को अच्छे से सुनती है। वे जनता को जात-पात से उठकर शिक्षा और विकास के नाम पर वोट देने की अपील कर रहे हैं। उनके चुनाव प्रचार में इनके विद्यार्थी भी गांव-गांव लगे हैं।

मुखिया के रूप में विपिन सर के कामों की खूब चर्चा होती है। पिछले वर्ष उक्त ग्राम पंचायत सरकार भवन के निर्माण को लेकर इनका विवाद केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और वैशाली के जिलाधिकारी (डीएम) जसपाल मीणा के साथ सुर्खियों में रहा है। जिलाधिकारी मीणा की धमकी से वे नहीं डरे। कुल मिलाकर विपिन सर एक पढ़े-लिखे और सुलझे हुए युवा हैं, जिनका क्षेत्र के मतदाताओं पर प्रभाव पड़ रहा है। लेकिन, निर्दलीय होने की वजह से उनके जीतने की संभावना कम है। फिर भी वे इतना वोट काट लेंगे, जिससे गठबंधन के उम्मीदवार को तो नुकसान होना ही है।

दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार संजय कुमार राय क्षेत्र में अपना सघन प्रचार अभियान जारी रखे हुए हैं। ये राजद के स्थानीय सक्रिय कार्यकर्ता और नेता रहे हैं। इस विधानसभा क्षेत्र से राजद के प्रत्याशी भी बनना चाह रहे थे, लेकिन इन्हें पार्टी से टिकट नहीं मिला। जिस वजह से निर्दलीय चुनाव मैदान में डटे हुए हैं।उनके चुनाव मैदान में डटे रहने से राजद के प्रत्याशी को नुकसान होने की संभावना है। इस विधानसभा के अन्य जो प्रत्याशी हैं वह किसी तरह चुनाव मैदान में है और अपनी जमानत बचाने की भी स्थिति में नहीं है।

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