सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। पश्चिमी सिंहभूम जिला (West Singhbhum District) के हद में गुवा दौरे के क्रम में झारखंड राज्य में बढ़ती हुई बेरोजगारी की समस्या पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए राज्य के विभिन्न स्थानों में बंद पड़े लौह अयस्क माइंस को चालू किए जाने की मांग बड़ाजामदा ट्रक ऑनर एसोसिएशन अध्यक्ष सह समाजसेवी अरविन्द चौरसिया ने राज्य एवं केंद्र सरकार से की है।
इस अवसर पर चौरसिया ने एक भेंट में बताया कि वर्तमान समय में अगर वैज्ञानिक तरीके से पश्चिम सिंहभूम व राज्य के विभिन्न स्थानों से लौह अयस्क की निकासी, माइनिंग कर की जाती है, तो काफी मात्रा में लौह अयस्क का निष्कासन संभव है।
उन्होंने कहा कि पिछले दिनों केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा जो आदेश दिया गया है, उससे राज्य के विभिन्न स्थानों का उत्खनन कार्य प्रभावित हो रहा है। केंद्र सरकार (Central Government) माइनिंग अधिनियम में संशोधन कर जितने भी 50 वर्ष पूरा हो चुका माइंस को नीलामी की प्रक्रिया में ले रही है, यह चिन्तनिय है।
राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में नीलामी नहीं किए जाने एवं अपने अधीन रख माइनिंग कराने की प्रक्रिया की मुहिम चला रही है। इसके लिए योजनाबद्ध तरीकों को अपनाया गया है। इसकी वजह से माइंस ऑनर परेशान हैं। परिणाम स्वरूप बेरोजगारी बढ़ती जा रही है।
चौरसिया ने बताया कि बहुत सारे झारखंड के माइंस को नीलामी प्रक्रिया के तहत ले ली गई है, जिसमे शाह ब्रदर्स, रामेश्वर जूट मिल, निर्मल कुमार-प्रदीप कुमार, आधुनिक स्टील, मिश्रीलाल, ठकुरानी माइंस जैसे दर्जन भर माइंस उक्त आदेश से अभी तक प्रभावित है। इन्हे मुख्य रूप से झारखंड सरकार के अधीन ले ली गई है। इससे उलझन की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
सीधे राज्य सरकार सुस्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर खनन किए गए माल को उठाने का निर्णय प्रदान करे। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सारी खदाने खोलने के लिए राज्य सरकार को निर्णय शीघ्र लेनी चाहिए। विगत दो साल के लॉक डाउन की वजह से झारखंड के कोने कोने से बेरोजगारी ने पैर फैलाना शुरू कर दिया है। भारी संख्या में नवयुवक बेरोजगार हो गए हैं। उन्हें काम मिलना चाहिए। बंद पड़े खदान को जल्द से जल्द चालू किया जाना चाहिए। वर्तमान चिंतनीय स्थिति की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान झारखंड सरकार (Jharkhand State) की रॉयल्टी बंद खदानों की वजह से प्रभावित हो रही है। राजस्व का नुकसान होना सरकार को आर्थिक नुकसान का संकेत है। भारी वाहनों से जुड़े लोगो की स्थिति दयनीय होती जा रही है। संपूर्ण राज्य में करीब 15,000 लोगों के बेरोजगार होने की पुष्टि सरकारी आंकड़ों के द्वारा की गई है।
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