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शोषण के खिलाफ लड़ाई के प्रतीक शहीद मेजर नागेन्द्र प्रसाद की दी गयी श्रद्धांजलि

प्रहरी संवाददाता/बोकारो। जन संघर्ष के अग्रदूत और प्रतिरोध की आवाज रहे मेजर नागेन्द्र प्रसाद की 32वीं शहादत दिवस 18 फरवरी को बोकारो जिला के हद में बालीडीह मनाया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य जनों ने मेजर नागेन्द्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान बड़ी संख्या में सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता एवं आमजन उपस्थित रहे।

मौके पर विस्थापित नेता काशीनाथ केवट ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि तीन दशक पूर्व आताताइयों ने मेजर नागेन्द्र की कायरतापूर्ण हत्या कर दी थी। उस समय वे आईपीएफ के उपाध्यक्ष के रूप में जन संघर्षों का नेतृत्व कर रहे थे। उनके नेतृत्व में बोकारो की शोषित-पीड़ित जनता माफिया ताकतों और जन विरोधी शक्तियों के खिलाफ संगठित होकर खड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि राज्यभर में शोषण और जुल्म-ज्यादती के विरुद्ध चले जनमुक्ति आंदोलन में उनका योगदान अविस्मरणीय है। शोषितों को संगठित कर उन्होंने अन्यायपूर्ण व्यवस्था को खुली चुनौती दी, जिसके कारण भ्रष्ट पुलिस-अपराधी गठजोड़ ने उनकी हत्या कर दी।

केवट ने कहा कि बोकारो जिला के हद में जरीडीह, कसमार और पेटरवार प्रखंड क्षेत्र की जनता आज भी उनके संघर्षों को स्मरण करती है। उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता मेजर नागेन्द्र के पुत्र राजेश प्रसाद ने की। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने पिता पर गर्व है, जिन्होंने गरीबों और शोषितों की लड़ाई लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। माले के पूर्व बोकारो जिला सचिव दिनेश सिंह ने कहा कि मेजर नागेन्द्र शोषित जनता के बीच रहकर संघर्ष करते थे। उनकी प्रतिबद्धता और साहस आज भी क्षेत्र के रहिवासियों को प्रेरित करता है।

राष्ट्रीय जनवादी मोर्चा के अध्यक्ष त्यागी वर्णवाल ने कहा कि 18 फरवरी केवल श्रद्धांजलि का दिन नहीं, बल्कि शोषण के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प दिवस है। कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर शहीद नागेंद्र को नमन किया गया तथा उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए। मौके पर समाजसेवी जगदीश केवट, मुन्ना गिरि, मधुसूदन तिवारी, झारखंड आंदोलनकारी कामेश्वर गिरि सहित कई गणमान्य जनों ने शहीद नागेंद्र के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।

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