प्रहरी संवाददाता/जमशेदपुर (झारखंड)। झारखंड की सीमा से सटे मंझारी प्रखंड के भागाबिला पंचायत के बड़बिल स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय प्रांगण में अनुसूचित जनजाति श्रमिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 16 जून को किया गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि राज्य के पूर्व मंत्री थे।
जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय श्रमिक शिक्षा एवं विकास बोर्ड (श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार) क्षेत्रीय निदेशालय जमशेदपुर के तत्वावधान में बड़बील में द्वि दिवसीय अनुसूचित जनजाति श्रमिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन किया गया।
कार्यक्रम के समापन समारोह में झारखंड के पूर्व मंत्री बड़कुंवर गगराई मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए गए थे। उन्होंने अपने संबोधन में कोल्हान प्रमंडल के जनजातीय श्रमिकों के सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति पर गंभीर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि गरीबी, अशिक्षा तथा नशाखोरी इस समुदाय के लोगों की मूल समस्या है।
जागरूकता की कमी के कारण इस समुदाय के लोग सरकार द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इसी वजह से ये लोग विकास की मुख्य धारा से पिछड़ गए हैं।
पूर्व मंत्री ने कहा कि जब तक इस समुदाय के लोग जागरूक नहीं होंगे, इनके प्रगति का मार्ग अवरुद्ध रहेगा। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्म निर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के युवाओँ में अपने कौशल को विकसित कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
इस अवसर पर बोर्ड के वरिष्ठ शिक्षा पदाधिकारी राज किशोर गोप ने कहा कि जनजातीय समुदाय में जागृति का संचार कर ही उन्हें प्रगति के पथ पर अग्रसर किया जा सकता है।
उन्होंने देश में हो रहे वैज्ञानिक परिवर्तन की जानकारी देते हुए कहा कि विज्ञान से जुड़े बिना तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अभाव आने वाला समय किसी भी व्यक्ति तथा समाज को बहुत पीछे छोड़ देगा, जिससे डिजीटल इंडिया के सपने को साकार नहीं किया जा सकेगा।
कार्यक्रम का संचालन बोर्ड के कार्यक्रम समन्वयक पीताम्बर राउत ने किया। उन्होंने ई श्रम कार्ड, बीओसी कार्ड बनाने के तरीके तथा इसके लाभ, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना तथा किसान सम्मान निधि योजना के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दिया।
कार्यक्रम में 40 महिला एवं पुरुष श्रमिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में वरिष्ठ समाजसेवी तथा भाजपा नेता वशिष्ठ प्रधान, गुरुचरण बांकिरा, मिथिलेश नन्द, विद्यालय के प्रधानाध्यापक महादेव मुंडा, सहायक शिक्षक जितेंद्र द्विवेदी, वार्ड सदस्य ललिता बिरुआ, वासुदेव महाराणा तथा गोविन्द चन्द्र गोप आदि का सराहनीय योगदान रहा।
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