अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर के नारायणी नदी किनारे नमामि गंगे दीपोत्सव घाट पर 19 अक्टूबर को आयोजित दीपोत्सव 2025 को संबोधित करते हुए श्रीगजेन्द्रमोक्ष देवस्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में हरिहरक्षेत्र जनजागरण मंच की प्रशंसा करते हुए कहा कि दीपोत्सव की परम्परा सत्य युग से चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि लंका से श्रीराम अयोध्या लौटे तो दीपावली मनाई गई थी। दीप जलाने से घर का वास्तु दोष समाप्त होता है। उन्होंने कहा कि हरिहरक्षेत्र दीपोत्सव आयोजन से पूरे विश्व में एक नया अध्याय जुड़ गया है। यह भव्य आयोजन हर साल लाखों सनातन धर्मानुरागियों को आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव, यानी दीपों का उत्सव भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जो प्रकाश की विजय, ज्ञान के उदय और नई शुरुआत का प्रतीक है।
चल पड़ा है कारवां तो बीच में रुकना मना है-स्वामी गुप्तेश्वर जी महाराज
बिहार के पुर्व डीजीपी जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी गोविंदाचार्य गुप्तेश्वर पांडेय जी महाराज ने इस आयोजन की सफलता में हरिहरक्षेत्र जनजागरण मंच के अहम योगदान की सराहना करते हुए कहा कि चल पड़ा है कारवां तो बीच में रुकना मना है और कहा कि यह सिलसिला रुकना नहीं चाहिए। उन्होंने हरिहर क्षेत्र की भूमि से अपने 15 वर्षों के संबंध की चर्चा करते हुए कहा कि यह संतों की भूमि है। जड़भरत की भूमि है।
लंका से रावण का वध कर अयोध्या लौटे तो मनी दीपावली- संत मौनी बाबा
बिहार प्रदेश उदासीन महामंडल के अध्यक्ष एवं लोकसेवा आश्रम सोनपुर के महंत संत विष्णु दास उदासीन उर्फ मौनी बाबा ने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के घर वापसी के उपलक्ष्य में दीपोत्सव परंपरा को देश और दुनिया में प्रसिद्धि मिली है। कहा कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास और रावण पर विजय प्राप्त कर माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटने की खुशी इस दीपोत्सव परंपरा के भीतर निहित है।
तमसो मा ज्योतिर्गमय का संदेश देता है दीपोत्सव- रामाशंकर शास्त्री
धर्म संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामाशंकर शास्त्री ने कहा कि हमारे देश का ही नाम दीपावली है। तमसो मा ज्योतिर्गमय (मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो) के शाश्वत संदेश को विश्व भर में प्रसारित करता है। कहा कि यह अंधकार पर प्रकाश की जीत है। भगवान ने नरकासुर का वध किया।

उन्होंने कहा कि लौकिक और पारलौकिक दोनों का कल्याण का पर्व है दीपावली। धर्म की जय की जय जयकार से सम्पूर्ण नारायणी नदी का किनारा गूंज उठा। विनोद कुमार यादव ने दीपोत्सव कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसके अतिरिक्त हरिहरक्षेत्र की एक और उपलब्धि है पंचकोसी एवं चौरासी कोसी परिक्रमा।
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