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पुलिस को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए सभी थानों में जनता दरबार जरूरी-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड पुलिस को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने एवं थानों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने हेतु राज्य के सभी जिलो के थानों में एसपी द्वारा जनता दरबार आयोजित किये जाने की जरूरत है।

झारखंड में पुलिस सुधार और नागरिक अधिकारों को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने 12 दिसंबर को झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक पत्र इमेल के माध्यम से भेजकर राज्य की पुलिस व्यवस्था में व्यापक सुधार की माँग की है।

डीजीपी को प्रेषित ईमेल संदेश में नायक ने कहा है कि झारखंड के अनेको थानों में शिकायत दर्ज कराने, एफआईआर स्वीकार करवाने और त्वरित न्याय प्राप्त करने में आम नागरिकों को खास कर दलित, आदिवासी, मूलवासी समाज को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई जगहों पर पुलिसिया खौफ, भ्रष्टाचार, अवैध वसूली तथा मनमानी की घटनाएँ जनता को न्याय से दूर कर रही हैं, जो चिंता का विषय है।

उन्होंने डीजीपी से मांग की कि राज्य के सभी जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को अनिवार्य रूप से आदेश जारी हो कि सभी थानो में जाकर नियमित जनता दरबार आयोजित करें। जनता दरबार की तिथि, समय और सूचना सार्वजनिक की जाए, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के रहिवासी अपनी शिकायतें सीधे वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचा सकें। थानों में देरी, भ्रष्टाचार, बदसलूकी या मनमानी होने पर एसपी स्तर से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जनता दरबार में उठाए गए मुद्दों की समीक्षा हर महीने एसपी कार्यालय में हो, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित रहे। नायक ने कहा है कि जनता दरबार से संबंधित थाना क्षेत्र के जनता से संवाद बढ़ेगा, भ्रष्टाचार टूटेगा और पुलिस का भय समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि थाना जनता के अधिकारों का पहला द्वार होता है। यदि वही भय और भ्रष्टाचार का केंद्र बन जाए, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिस को मजबूत बनाने का एक ही रास्ता है, जनता को मजबूत और सुरक्षित महसूस कराना। जनता दरबार उसी दिशा में सबसे प्रभावी कदम होगा और इसे किन्तु परन्तु ना कर तत्काल रूप से लागू किया जाना चाहिए। ईमेल भेजकर नायक ने विश्वास जताया कि यदि यह व्यवस्था तुरंत लागू होती है, तो झारखंड की पुलिस व्यवस्था अधिक संवेदनशील, पारदर्शी, विश्वासयोग्य और भ्रष्टाचार-मुक्त बन सकती है।

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