प्रतियोगी युग में शिक्षकों का कौशल संवर्धन आवश्यक-ओ पी मिश्रा
सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। शिक्षा का अलख जगाने के ध्येय से डीएवी सेंटर ऑफ एकेडमिक एक्सीलेंस नई दिल्ली के तत्वधान में सूरजमल जैन डीएवी पब्लिक स्कूल चाईबासा मे तीन दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का 9 जून को शुभारंभ किया गया। यहां सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी ओ. पी. मिश्रा व् क्लस्टर हेड रेखा कुमारी के मार्गदर्शन में शिक्षकों की तीन दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।
जानकारी के अनुसार उक्त कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। उद्घाटन समारोह में सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी मिश्रा ने विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रतियोगी युग में शिक्षकों का कौशल संवर्धन आवश्यक है, क्योंकि इंटरनेट शिक्षकों से बेहतर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आज भी शिक्षकों का कोई विकल्प नहीं।
कार्यशाला में मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में नई शिक्षा नीति में आए बदलाव की चर्चा एवं योजना की जानकारी शिक्षकों को देना अनिवार्य है। इसमें बताया गया कि योजना को कैसे स्कूलों में क्रियान्वित किया जाय, ताकि पठन-पाठन कार्यक्रम सरल हो सके। साथ हीं बच्चों में अच्छा इंसान बनाने के लिए नैतिक मूल्य को शिक्षा से जुड़ाव दिया जाना उन्होंने अत्यंत अनिवार्य बताया।
डीएवी चाईबासा की प्राचार्या रेखा कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में जिस प्रकार से बदलाव आ रहे हैं, ऐसे में इस कार्यशाला की महत्ता बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि क्षमता संवर्धन कार्यशाला बच्चों व शिक्षकों के लिए अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होगा। मौके पर कार्यक्रम के महत्त्व पर शिक्षक विवेकानंद मिश्रा ने प्रकाश डाला व शिक्षिकाओं द्वारा प्रेरणा गीत प्रस्तुत किया गया।
कार्यशाला में विभिन्न स्कूलो के प्राचार्यों में डीएवी झींकपानी के एस. के. पाठक, डीएवी बुण्डू के तन्मय बनर्जी, डीएवी चिरिया के एस. के. झा, डीएवी बहरागोडा के अनूप कुमार, डीएवी नोवामुंडी के पी. के. भुईंया, डीएवी गुवा की उषा राय इत्यादि शिक्षा प्रतिनिधि उपस्थित थे।
इस कार्यशाला में डीएवी चाईबासा, एनआईटी, नोवामुण्डी, झींकपानी, गुआ, बहरागोड़ा, चिड़िया और डीएवी बुंडू से सभी विषयों के कुल 300 शिक्षक- शिक्षिकाओं ने भाग लिया। स्वागत भाषण तथा मंच संचालन शिक्षक एस. बी. सिंह ने किया।
कार्यशाला के दूसरे चरण में डीएवी बहरागोड़ा के प्राचार्य अनूप कुमार ने खासतौर से विज्ञान शिक्षकों के प्रशिक्षण में प्रयोगी शिक्षा के उपयोग पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किया।
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