रेलवे की जमीन पर कुर्ला से वाशीनाका तक फैला है झोपड़ों का जाल
मुश्ताक खान/मुंबई। मध्य रेलवे के सहायक मंडल अभियंता (रेलपथ) ने कुर्ला स्टेश्न (Kurla Station) से लेकर वर्मा सेल लाईन के वाशीनाका स्थित ट्रांबे यार्ड तक के झोपड़ाधारकों को जमीन खाली करने का नोटिस दिया जा रहा है।
इस नोटिस से रेल पटरियों के किनारे बसे करीब 12 से 15 सौ दुकान, मकान, गोदाम और झोपड़ाधारक बौखला गए हैं। चूंकि 5 -6 दशक से इन स्थानों पर लोग आबाद हैं और यहीं से उनकी रोजी रोटी भी चलती है।
ऐसे में अगर रेलवे (Railway) द्वारा कार्रवाई की जाती है तो बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार होने के साथ -साथ बेघर भी हो जाएंगे। ऐसे में इस इलाके के लोगों पर चौतरफा मार पड़ेगी।
जगत प्रहरी में रेलवे की नोटिस (Notice) के आधार पर समाचार प्रकाशित किया गया है। 30 दिसंबर को प्रकाशित समाचार में रेलवे द्वारा होने वाली कार्रवाई के बाद संभावित सकारात्मक व नकारात्मक के साथ-साथ सयाह पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया है।
इस कड़ी में कुर्ला पूर्व रेलवे स्टेशन से लेकर वर्मा सेल रेलवे लाइन के किनारे ट्रांबे यार्ड तक करीब 12 से 15 सौ दुकान, गोदाम और झोपड़ाधारकों का आशियाना है।
इस परिसर में इंदिरा नगर, राजीव गांधीनगर, इंदिरा नगर विकास मंडल, शिवशक्ति नगर, मारोली चर्च, सरदार वल्लभभाई पटेल नगर, शरद नगर, इस्लामपूरा, जय हिंदनगर, शंकर देवल और लाल डोंगर आदि स्थानों का समावेश है।
मध्य रेलवे की इस नोटिस ने न केवल लोगों की निंद उड़ा दी है बल्कि इससे लोग बैखला गए हैं। वहीं इस इलाके की जनता ने रेलवे पर सवालों की बौछार कर दी है।
उपरोक्त इलाके के लोगों ने रेलवे की गलतियां और उसके निकम्मेपन का बखान भी करना शुरू कर दिया है। कुछ बुद्धिजिवियों ने नोटिस जारी करने वाले अभियंता को ही कटघरे में खड़ा करने का मन बना लिया है।
इन क्षेत्रों के रहिवासियों के अलग-अलग तर्क हैं। यहां के लोगों ने रेलवे के खिलाफ अदालती लड़ाई लड़ने के लिए कमर कस लिया है। चूंकि इन 6 दशकों में यहां के लोगों ने बहुत कुछ देखा है और लगभग सभी के पास दस्तावेजों का पुलिंद है। जहां रेलवे को आसानी से चीत किया जा सकता है।
वर्मा सेल रेलवे लाइन के किनारे बसे लोगों के पास अलीदादा के दौर से अबतक के पूरावे भी हैं। झोपड़ा धारकों के पास दस्तावेजों में फोटो पास, राशनकार्ड, बिजली बील, वोटर कार्ड, मनपा और कलेक्टर कार्यालयों को झोपड़ों की भुक्तान की रशीदें आदि हैं।
गौरतलब है कि वर्मा सेल रेलवे लाइन के किनारे बसे लोग कई हिस्सों में बंटते जा रहे हैं। इनमें कुछ लोगों का कहना है की हम लोग अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। वहीं दूसरी तरफ लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर रेलवे अपनी जमीन को खाली करा सकती है।
यानी जितनी मूंह उतनी बातों का सिलसिला चल पड़ा है। अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि मध्य रेलवे आगे कौन सा कदम उठाती है। ऐसे में अगर कार्रवाई हुई तो 12 से 15 सौ परिवारों को झोपड़ों की जगह आशियाना मिलेगा या नहीं? चूंकि रेलवे में झोपड़ों की जगह घर देने का कोई प्रवधान नहीं है।
ऐसे में अगर उपरोक्त इलाके के लोगों ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाया तो काफी वख्त लग सकता है और राज्य सरकार (State Government) इन लोगों की गूहार सुनेगी या नहीं यह सब अभी भविष्य के गर्व में छिपा है।
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