द्रविड़ पद्दति से विवाह आयोजन में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु

देवस्थानम में श्रीबालाजी वेंकटेश का श्रीदेवी व भूदेवी संग विवाह

अवध किशोर शर्मा/सोनपुर (सारण)। सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर के साधु गाछी में नारायणी नदी के श्रीगजेन्द्र मोक्ष देव स्थानम घाट के किनारे चल रहे 24वें श्रीब्रह्मोत्सव सह श्रीलक्ष्मी नारायण यज्ञ के पांचवें दिन 4 फरवरी को तिरुपति बालाजी वेंकटेश का विवाह महोत्सव (कल्याण उत्सव) पूर्णतः वैदिक रीतियों के साथ श्रीदेवी और भूदेवी के साथ संपन्न कराया गया। इस विवाह समारोह के साक्षी बने क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु गण। यहां द्रविड़ पद्दति से विवाह आयोजन में शामिल हुए क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु।

इस अवसर पर दिव्यदेश में फूलों एवं फलों से युत भव्य विवाह मंडप बनाया गया था। संध्या कालीन बेला में हल्दी रश्म की अदायगी के बाद वैवाहिक पोशाक धारण कर भगवान श्रीवेंकटेश रथ पर सवार होकर मंडप में गए। श्रद्धालुओं द्वारा यहां द्वार पूजा का कार्यक्रम किया गया। भगवान श्रीविष्वकसेन की पूजा हुई।

भगवान के साथ पहुंचे बरातियों में भजन सम्राट डॉ दीपक मिश्रा, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी उद्धव प्रपन्नाचार्य, जगद्गुरु स्वामी सुंदरराज, जगद्गुरु नारायणाचार्य, जगद्गुरु विष्णु चित्तस्वामी, श्रीमहंत श्याम नारायणाचार्य का स्वागत श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्यदेश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने किया।

इस अवसर पर जयमाला का कार्यक्रम किया गया। पांच रात्र पद्दति से तिरुपति श्रीबालाजी भगवान का विवाह संपन्न हुआ। कन्या दान करने वाले पक्ष से आशा पाठक, दिलीप झा, सुधांशु सिंह, रतन कुमार कर्ण, हीरा कुमारी, फूलबाबू झा, नीलू झा, एवं फूल झा ने मिलकर कन्यादान किया। तत्पश्चात सिंदूरदान का कार्यक्रम संपन्न कराया गया। विवाह का संचालन वैदिक पुरोहित ने किया।

पूरे वैवाहिक कार्यक्रम में वैदिक मंत्रों का पाठ चलता रहा। वर-वधू की पारिवारिक वंशावली का उच्चारण भी किया गया। भगवान और उनकी दुल्हनों की मूर्तियां एक दूसरे के सामने रखी गयी थी। पुजारी द्वारा उचित होम करने के बाद, दूल्हा और दुल्हन को एक दूसरे को उचित शुभ मुहूर्त में देखने की अनुमति दी गई थी।

मानव शरीर में विवाह सबसे महत्वपूर्ण कर्म-जगद्गुरु

श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्यदेश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने 4 फरवरी को 24वें ब्रह्मोत्सव कल्याण महोत्सव के अवसर पर कहा कि मानव धर्म में विवाह सबसे महत्वपूर्ण कर्म है।विवाह गुड्डे-गुड़ियों का खेल नही।बिना विवाह के वंश संरक्षण संभव नही। विवाह से ही वंश की रक्षा होती है। पति-पत्नी का अन्योन्याश्रय सम्बंध है।

पत्नी रथ है तो पति रथी। उन्होंने कहा कि हमारे यहां पत्नी को धर्मपत्नी कहा गया है। भोग पत्नी नही। एक पुत्र या एक पुत्री होने के बाद पत्नी पूजनीय बन जाती हैं। पत्नी को कभी एक बचन में नही बोलना चाहिए। आदर सूचक शब्दों का सदैव व्यवहार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कन्यादान सोलह संस्कारों में प्रमुख है। यज्ञ करने से ही संस्कार होता है। सोलह संस्कारों में जात कर्म, नामकरण, अन्नप्राशन, वेदारम्भ, समावर्तन, केशांत, कर्णवेध, उपनयन, विवाह आदि शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इस दिव्यदेश में विवाह समारोह सह कल्याण महोत्सव पिछले 24 वर्षों से प्रतिवर्ष माघ शुक्ल चतुदर्शी को होता है। इस मौके पर भजन सम्राट डॉ दीपक मिश्रा, जगद्गुरु स्वामी उद्धव प्रपन्नाचार्य भी उपस्थित थे। जगद्गुरु स्वामी नारायणाचार्य आदि संतगण भी उपस्थित थे।

हजारों भक्तों ने किया यज्ञ मंडप की परिक्रमा

श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम घाट किनारे दिव्यदेश प्रांगण में चल रहे 24वें श्रीब्रह्मोत्सव सह श्रीलक्ष्मी नारायण यज्ञ के चौथे दिन हजारों श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा की। इस दौरान हवन कुंड में वैदिक मंत्रोच्चारणों के साथ हवन चल रहा था।

श्रीगजेन्द्रमोक्ष देवस्थानम दिव्यदेश में श्रीदेवी, भूदेवी,लक्ष्मी देवी एवं बालाजी वेंकटेश के साथ-साथ आलवार संतों की पूजा-आरती की गयी। भजन-कीर्तन के साथ मुख्य मंदिर के परिक्रमा पथ पर भगवान की सवारी भी निकली। रथ के आगे-आगे चल रहे संतों को देखकर भक्तगण अघाते नही थक रहे थे।

बक्सर के ब्रह्मपुर धाम के दियरांचल पीठाधीश्वर रामानुजाचार्य स्वामी उद्धव प्रपन्नाचार्य जी महाराज, आचार्य धर्मेन्द्र रथ यात्रा में भक्तों के साथ शामिल थे।

इस भव्य रथ पर विराजमान भगवान श्रीबालाजी वेंकटेश, श्रीदेवी एवं भूदेवी की उत्सव मूर्ति का दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्तगण परिक्रमा में शामिल हुए। रमणीय पवित्र वातावरण में भक्ति भाव से नाचते-गाते भक्तों की टोली इस तरह चल रही थी, मानों भगवान की भक्ति में तन-मन सब कुछ समर्पण कर दिया हो।

सुध-बुध खो दिया हो। मंदिर के चारो तरफ परिक्रमा पथ की यात्रा के बाद भक्तों ने मंदिर में माथा टेका। इस दौरान आरती-पूजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त गण शामिल हुए। महिलाओं की संख्या अधिक थीं। सभी भक्तों को प्रसाद वितरण भी किया गया।

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