रैयतों ने सीसीएल के सीएमडी को भेजा आवेदन
प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में सीसीएल के बीएंडके एरिया द्वारा डीआर/आरडी परियोजना के नाम पर पेटरवार प्रखंड के चलकरी दक्षिणी व् उत्तरी पंचायत के ग्रामीण भूमि रैयतों की सैकड़ो एकड़ अधिग्रहित भूमि सीबी एक्ट1957 के तहत बीते वर्ष 1982-83 एवं 1985 में अधिग्रहित की है।
बता दे कि, सीसीएल प्रबंधन ने चलकरी उत्तरी में बड़ी संख्या में रैयतों को नियोजन एवं मुआवजा भी दिया। डीआर तो नहीं पर आरडी (रेलवे डायवर्शन) के लिए दो स्थलों पर पुल बनाए गये। इसमें कितने राहगीर गिरकर असमय ही काल कलवित हुए। कीमती लोहे भी कथित अपराधियों के हाथ लगे।अंततः दोनों परियोजना धरे के धरे रह गये।
इधर कथित अधिग्रहित भूमि पर प्रबंधन अबतक कोयले का उत्पादन कर नहीं पाई। प्रबंधन अब उसमें सोलर लाइट परियोजना स्थापित करने का मन बनाया है। ग्रामीण रैयतों की मांग है कि हमें मूलभूत सुविधा जैसे बिजली, पानी, स्वास्थ, शिक्षा आदि सुविधा आश्रितों के परिवारों को मुहैया कराई जाए।
ध्यान देने योग्य है कि इसे लेकर कई बैठके आयोजित की गयी, पर इस मुद्दे पर आपसी सहमति नहीं बन पा रही है। प्रबंधन का कहना है कि अधिग्रहित भूमि के एवज में पुर्व में हीं रैयतों को नियोजन एवं मुआवजा दे दिया गया है। किसी से सहमति की जरूरत नहीं। दूसरी ओर चलकरी दक्षिणी एवं उत्तरी पंचायत के ग्रामीण प्रबंधन की मनमानी नीति के विरुद्ध गोलबंद होने लगे हैं। ग्राम सभा चलकरी दक्षिणी पंचायत की ओर से ग्राम प्रधान दुर्गा सोरेन, मुखिया रजनी देवी द्वारा इस आशय का एक आवेदन सीसीएल मुख्यालय दरभंगा हाउस रांची में अध्यक्ष सह प्रबंध-निदेशक को बीते 2 मार्च को दिया गया है। इसकी प्रतिलिपि झारखंड के मुख्यमंत्री सहित बोकारो जिला उपायुक्त, एसपी, एसडीओ बेरमो एवं बीएंडके जीएम को भी दिया गया है।
ग्रामसभा द्वारा प्रेषित आवेदन में कहा गया है कि गुजरे 43 वर्षों की अवधि में प्रबंधन द्वारा मानवीय मूल्यों तथा मौलिक अधिकारों का हनन किया गया है। उक्त भूमि पर खरीद, बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है। सीसीएल प्रबंधन की इस नीति से अपनी भूमि को न बेच पा रहे हैं और न कोई अन्य कार्य में उपयोग कर पा रहे हैं। आवेदन में कई मांग भी शामिल है, जिसमें करगली फिल्टर प्लांट से नियमित जलापूर्ति, लंबित रैयतों को शीघ्र नियोजन, इंग्लिश मीडियम स्कूलों में शिक्षा के मद में 50 प्रतिशत सब्सिडी, हारलाडीह, सोनाडीह, झरनाटांड़ आदि टोला को पुनर्वासित करने आदि मांग शामिल है।
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