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गुवा-बड़ाजामदा बाजारों में धनतेरस पर रौनक तो रही, पर जेबों पर लगाम व् सुस्ती

पिछले वर्ष की तुलना में करीब 40 प्रतिशत तक कम रही बिक्री-संतोष प्रसाद

दीपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है-भीम शर्मा

सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। धनतेरस के अवसर पर 19 अक्टूबर को पश्चिम सिंहभूम जिला के हद में गुवा और बड़ाजामदा के बाजारों में सुबह से ही खरीददारों की हलचल दिखी, लेकिन इस बार खरीदारी का जोश फीका नजर आया।

जानकारी के अनुसार शहर के मुख्य बाजारों में मिट्टी के दीये, पूजा सामग्री और गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियों की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ रही। महिलाएं और बच्चे उत्साहपूर्वक पारंपरिक वस्तुएं खरीदते नजर आए। हालांकि, पटाखे, पीतल-कांसे के बर्तन, स्टील के सामान और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की दुकानों पर भीड़ न के बराबर रही।

इस बावत दुकानदारों ने बताया कि महंगाई और आर्थिक तंगी के कारण रहिवासी सिर्फ जरूरी सामान तक सीमित रह गये है। जिला के हद में बड़ाजामदा क्षेत्र के समाजसेवी संतोष प्रसाद ने कहा कि इस बार बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में करीब 40 प्रतिशत तक कम रही। कहा कि रहिवासी केवल पूजा से जुड़ी वस्तुएं ही खरीद रहे हैं। ग्राहकों ने भी माना कि बढ़ते दामों ने उनका त्योहारी बजट को बिगाड़ दिया है। समाजसेवी भीम शर्मा ने कहा कि वे इस बार दीपावली सादगी से मनाएंगे।

ध्यान देने योग्य है कि दीपावली अंधकार पर प्रकाश की विजय, बुराई पर अच्छाई और अज्ञान पर ज्ञान का प्रतीक है। यह त्योहार मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी का प्रतीक है। समाज में सबों को एकजुट रहना चाहिए। इस दौरान क्षेत्र के कुछ युवाओं ने ऑनलाइन शॉपिंग को प्राथमिकता दी, जिससे स्थानीय बाजारों की रौनक और कम हो गई।

शाम होते-होते बाजारों में थोड़ी चहल-पहल जरूर बढ़ी, जब रहिवासी दीपावली पूजा की तैयारी के लिए आखिरी समय में दीये और मिठाइयां खरीदने पहुंचे। कुल मिलाकर इस वर्ष गुवा और बड़ाजामदा के बाजारों में इस बार धनतेरस की रौनक तो दिखी, पर खरीदारों की कमी ने त्योहार की चमक को कुछ मंद कर दिया है।

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