एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। मुजफ्फरपुर शहर के नवयुवक समिति सभागार में बीते 31 दिसंबर को नटवर साहित्य परिषद की ओर से मासिक कवि सम्मेलन सह मुशायरा का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ विजय शंकर मिश्र, मंच संचालन सुमन कुमार मिश्र व धन्यवाद ज्ञापन नटवर साहित्य परिषद के संयोजक डॉ नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी ने किया। उक्त जानकारी मुजफ्फरपुर की युवा कवियित्री सविता राज ने दी।
उन्होंने बताया कि नटवर साहित्य परिषद द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन की शुरुआत आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के गीतों से किया गया। इसके बाद गीतकार डॉ विजय शंकर मिश्र ने गीत सुखद निरामय नया वर्ष हो, जन जीवन में सदा हर्ष हो प्रस्तुत कर भरपूर तालियां बटोरी। गजलकार डॉ नर्मदेश्वर मुज़फ़्फ़रपुरी ने ग़ज़ल नव वर्ष की शुभकामनाएं सबको भेज रहा हूं मैं यार, नया साल हो तुम्हें मुबारक खुशी रहे तेरा घर परिवार कार्यक्रम को यादगार बना दी।
युवा कवि सुमन कुमार मिश्र ने युग युग से उठते रहे ज्वार और युग युग से मिलती रही चाँदनी सुनाकर तालियां बटोरी। कवि ओम प्रकाश गुप्ता ने दुख में किसी की छलक ना सके, ऐसी सुन्दर नयन का क्या फायदा भावपूर्ण कविता पेश की। कवि डॉ जगदीश शर्मा ने कोहरे का कहर बड़ा गांव शहर में जारी है, ओस की टपकी बूंदों से भीगी सड़कें सारी है सुनाकर तालियां बटोरी।
इस अवसर पर युवा कवि मोहन कुमार सिंह ने नया साल आने वाला है, इतिहास बनाने वाला है सुनायी। कवि सहज कुमार ने कहो कर कटा दू, कहो सर कटा दू सुनाकर तालियां बटोरी। कवि अरूण कुमार तुलसी ने हमसे सच की सुनो कहानी, जिससे मरे झूठ की नानी प्रस्तुत कर यथार्थ से परिचय कराया।
कवयित्री मुन्नी चौधरी ने मेरे गीत मुझे प्यारे हैं, इन नयनों के तारे हैं सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को गुदगुदाया। कवयित्री प्रो. रेखा जयसवाल ने दिन रात दीया बन जलती हूँ, अपने ही घर के आंगन में सुनाकर जमकर तालियां बटोरी। अशोक भारती ने जिला स्थापना दिवस का मिलना भी क्या मिलना, धूमधाम से इसे मनायें तो कुछ बात बने प्रस्तुत कर तालियां बटोरी।
यशपाल कुमार ने हम सबकी लीची नगरी जग बोले इसे बाबा गरीबनाथ नगरी मुजफ्फरपुर शहर की विशेषता का वर्णन कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया। दीन बंधु आजाद ने कुछ भी करने से ये दुनिया हैरान क्यों है सुनाकर तालियां बटोरी। कवयित्री मुस्कान केशरी ने जिंदगी में कोई तो होना चाहिए प्रस्तुत की।
ब्रज भूषण प्रसाद ने दीवाना तेरे प्यार में, पागल दिल को समझाता हूँ सुनाकर श्रोताओं का समर्थन प्राप्त किया। कवियित्री सविता राज के अनुसार कवि सम्मेलन व् मुशायरा के मौके पर उपरोक्त कवियों के अलावा सुरेन्द्र कुमार, पल्लव कुमार सुमन, श्रीराम बंका सहित दर्जनों गणमान्य मौजूद थे।
164 total views, 1 views today