अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर अंचल का सम्पूर्ण इलाका शिव- शक्ति की सम्मिलित प्रभा से आलोकित है। इसके चप्पे -चप्पे में शिव और शक्ति का वास है। यहां के प्राचीन मंदिरों में शिव – शक्ति की विलक्षण प्रतिमाएं अवस्थित है, जिनमें शिव – शक्ति की विभिन्न अर्थों को प्रकट करनेवाली अदभुत एवं अलौकिक मुद्राओं का दर्शन होता है।
चलिए देखते व समझते हैं शिवरात्रि प्रसंग में शिव – शक्ति को। बाबा हरिहरनाथ – पहलेजा निचली मुख्य सड़क के उत्तरी किनारे सोनपुर गांव के दक्षिणी किनारे बाबा बालनाथ समाधि मंदिरों के बीच अवस्थित एक पुराने लघु व जर्जर मंदिर में शिवलिंगोदभूत देवी शक्ति अवस्थित हैं। ऐसी ही प्रतिमा नयागांव के मंदिर में भी है। निकटवर्ती वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर नगर के हेला बाजार, रामचौरा मंदिर परिसर में भी प्रतिमा स्थापित है। इन शिव लिंगों पर देवी (शक्ति) की सूक्ष्म आकृतियों का उकेरा जाना भारतीय वास्तुकला और आध्यात्मिकता का एक अद्भुत संगम है। इसे शिव-शक्ति एकीकरण के रूप में देखा जाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से अद्वैत का प्रतीक सनातन धर्म में शिव और शक्ति को अलग नहीं माना गया है। दार्शनिक सिद्धांतों के अनुसार शिव लिंग पर देवी की आकृति दार्शनिक सिद्धांतों को दर्शाती है। जिस प्रकार आग और उसकी गर्मी को अलग नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार शिव (चेतना) और शक्ति (ऊर्जा) अभिन्न हैं। लिंग पुरुषत्व का प्रतीक है और उस पर देवी की सूक्ष्म आकृति स्त्रीत्व की उपस्थिति को दर्शाती है। लिंग पर देवी की आकृति यह बताती है कि ब्रह्मांड का निर्माण केवल चेतना और ऊर्जा के मिलन से ही संभव है, जो सौम्यता और करुणा का प्रतीक हैं। शिव – शक्ति की यह उपस्थिति आज की आधी आबादी के स्वत्त्व का बोधक है।

इसी तरह निकट ही सोनपुर गांव के चिड़िया मठ विशाल नाथ मंदिर में शिव -पार्वती की प्रतिमा है, जिसमें देवी तपस्या की मुद्रा में शिवजी के बगल में अवस्थित हैं। आइए सोनपुर के काली घाट के ऊंचेडीह पर जहां कोलकाता के बाद दूसरी दक्षिणेश्वरी काली मंदिर अवस्थित है, जिसमें देवी की शिव के साथ संयुक्त मूर्ति है। अंतर यही है कि यहां शिव देवी के चरणों के नीचे हैं और देवी कालिका के वेश में नारी शक्ति का उग्र प्रदर्शन कर रही हैं। आध्यात्मिक रूप से देखें तो यहां शिव शव के समान हैं और देवी के चरणों में निपतित हैं। यानी शक्ति के बिना शिव भी अशक्त हैं।
निकट ही आपरुपी गौरी शंकर मंदिर में शिव शक्ति की काम विजय मुद्रा की विलक्षण प्रतिमा है, जो भगवान शिव एवं देवी पार्वती के कल्याणकारी मिलन का प्रतीक है। इसके अतिरिक्त शिव एवं शक्ति की नवीन प्रतिमाओं का दर्शन अनेक मठ व् मंदिरों में होता है।
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