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पटना पुस्तक मेला में रंगकर्मी व् टीवी कलाकार मनीष महिवाल किए गये सम्मानित

एस. ली. सक्सेना/पटना (बिहार)। बिहार के प्रसिद्ध रंगकर्मी, टीवी कलाकार व् लेखक निर्देशन मनीष महीवाल को 8 दिसंबर को राजधानी पटना में आयोजित पुस्तक मेला में सम्मानित किया गया।

ज्ञात हो कि वैशाली जिला के हद में बिष्णुपुर टितिढ़ा गांव में जन्मे बालक मनीष की रूचि बचपन से ही कला और खेलों में थी। स्कूली शिक्षा के दौरान वे अपने स्कूल के नाटकों और खेलों में भाग लिया करते थे। इस दौरान मोहल्ले के एक परिचित इप्टा से जुड़े थे, उनके माध्यम से मनीष का पदार्पण रंगमंच में हुआ।

इप्टा के अलावा उन्होंने कई अन्य संस्थाओं के साथ काम करते हुए रोमियो जूलियट, रक्त कल्याण, कैलिगुला, कबीरा खड़ा बाज़ार में, देख रहे हैं ना, दूर देश की कथा, बुद्धं शरणं गच्छामिः, कोणार्क, अंधा मानव, बैंड मास्टर, तऽ हम कुंवारे रहे, हे तथागत्, मधुशाला, सिपाही की माँ, देवन मिसिर, ठंडा गोरत, खोल दो, जानेमन, भिखारिन, चंडालिका, कुच्ची का कानून आदि नाटकों में अभिनय किया है।

नाटकों के अलावा मनीष महीवाल का जुड़ाव फिल्मों तथा टीवी सीरियल से भी रहा है। उन्होंने कई हिन्दी, भोजपुरी एवं मैथिली वीडियो एलबमों, टेली फ़िल्मों, धारावाहिकों तथा फ़िल्मों में भी अभिनय किया है। उन्होंने पटना दूरदर्शन, महुआ टीवी, ई टीवी, न्यूज़ 18 जैसे कई चैनलों के कई कार्यक्रमों में भाग लिया, जिसमें जनता एक्सप्रेस इतना मशहूर हुआ कि इन्हें हास्य-व्यंग कलाकार के रूप एक नई पहचान मिली।
महीवाल द्वारा न्यूज़ चैनल देसी पत्रकार द्वारा नियमित तौर पर स्थानीय ख़बरों तथा घटनाओं को प्रस्तुत किया जाता रहा है तथा यू ट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि पर प्रसारित किया जाता है।

वर्ष 2011 में महीवाल सांस्कृतिक संस्था लोक पंच की नींव डाली तथा इसके द्वारा कई नाटकों की प्रस्तुति की जा चुकी है। जिसमें प्रमुख हैं जागो रे किसान, कोरोना से बचाओ, पास नहीं आइए, जनता कर्फ्यू, सारी रात, नाट्य शिक्षक की बहाली, जब जागे तभी सवेरा, बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ, वोट से करेगा चोट, बेटी पढ़कर क्या करेगी, बेरोज़गार, दारू वाले भाई, कातिल खेत आदि नाटकों की प्रस्तुतियाँ बिहार के विभिन्न जिलों में की गयी है। उन्होंने वर्ष 2017 से दशरथ माँझी नाट्य महोत्सव की शुरूआत की और प्रतिवर्ष इसका आयोजन बिहार के उन गाँवों में करते रहे हैं, जहाँ रंगमंच का प्रचार- प्रसार नहीं है। उन्होंने संस्था की इकाई राहत मंच द्वारा समय- समय पर ग़रीबो में कंबल, कपड़े तथा खाद्य सामग्री का वितरण किया है।

महीवाल ने बिहार की राजधानी पटना में हुए भीषण जल जमाव में ज़रूरतमंदों को राशन- पानी पहुँचाने का इंतज़ाम किया तथा कोविड महामारी में मास्क, सैनिटाईज़र, साबुन तथा राशन का वितरण किया साथ हीं जगह जगह वैक्सीनेशन कैम्प लगवाया। नाट्य कला को एक विषय के रूप में विद्यालयों तथा महाविद्यालयों में पढ़ाए जाने एवं अध्यापकों की नियुक्ति हेतु नाटक नाट्य शिक्षक की बहाली की सैकड़ो प्रस्तुतियाँ की है एवं इसके लिए कई सरकारी विभागों में आवदेन भी दिया है और ये मांग अब भी जारी है।

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