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मानस पटल पर अपनी सुनहरी यादें छोड़ गया विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला के सरकारी स्तर पर समापन के बाद की उदासी 10 दिसंबर को मेला यात्रियों के चेहरे पर स्पष्ट झलक रही थी। लगातार 32 दिनों तक आयों हरिहर क्षेत्र मेला के पर्यटन विभाग के मंच ने पर्यटको का जबर्दस्त मनोरंजन किया है। बिदाई की यह शाम खासकर क्षेत्र के रहिवासियों को दर्द का अहसास करा रही थी।

ज्ञात हो कि, किसी भी चीज की मौजूदगी की पहले से समय सीमा तय होती है। इस मेले की भी मियाद तय थी। इन्हीं लम्हों पर वर्ष 1948 में बनी मेला फिल्म का मो. रफी का गया यह गाना ये जिंदगी के मेले दुनिया में कम न होंगे, अफसोस हम न होंगे ये जिंदगी के मेलें। एक दिन पड़ेगा जाना, क्या वक्त क्या जमाना। कोई न साथ देगा सब कुछ यहीं रहेगा। रह जायेंगे हम अकेले ये जिंदगी के मेले।

हरिहर क्षेत्र के मेला समापन और अपने-अपने गंतव्य की ओर लौटने की ओर कदम बढ़ाते सरकारी प्रदर्शनियों के कर्मियों पर यह एकदम सटीक बैठता है। मेला का समापन की घोषणा होते ही मेले में लगी कोल इंडिया, खान विभाग, रेल ग्राम का पीर पंजाल टनल की प्रदर्शनी, एलआईसी, पीएनबी, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, पंचायती राज, पर्यटन विभाग, कृषि विभाग, शिक्षा विभाग, पशुपालन विभाग, ग्राम श्रीमंडप, आदि।

स्वास्थ्य विभाग की प्रदर्शनी एवं अस्थाई चिकित्सालय, सहकारिता, ईंख, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार पुलिस, मीडिया सेंटर, कल्याण विभाग सहित सभी सरकारी प्रदर्शनियों की सारी गतिविधियां समाप्त हो गई। कई प्रदर्शनियों ने समापन से पूर्व बोरिया बिस्तर दिन में ही समेट लिया था। दर्शकों में उदासी साफ झलक रही थी।
वहीं दूर से आए गैर सरकारी प्रदर्शनियों ने भी अपना कारोबार बटोरना शुरू कर दिया है।

लेकिन मेले में भीड़ में कोई कमी नही देखी जा रही है। बताया जाता है कि 10 दिसंबर को गर्म कपड़ों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ में कोई कमी नहीं थी। कश्मीरी दुकानों पर भी जमकर खरीद-बिक्री चल रही थी। मेला अवधि के 32 दिनों के भीतर देश एवं विदेश में अपनी कला का जादू बिखेरने वाले कलाकारों की मेला के मंच पर लगातार उपस्थिति बनी रही।

सोनपुर मेला में पर्यटन विभाग का मुख्य सांस्कृतिक मंच 32 दिनों तक बना रहा बहुरंगी सांस्कृतिक प्रेक्षागृह

विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला के नखास ग्राउंड में स्थित पर्यटन विभाग का मुख्य सांस्कृतिक मंच 32 दिनों तक बहुरंगी सांस्कृतिक मंच बना रहा, जहां देश भर के कलाकारों ने एक मंच से एक माह से अधिक समय तक अपना हुनर दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया।कलाकारों ने अपने गीतों एवं नृत्यों के माध्यम से देश में प्रचलित नृत्य और संगीत की विविध कलाओं का जैसा जीवंत प्रस्तुति किया, वह अविस्मरणीय रहेगा।

मेला अवधि में लोकप्रियता के शिखर पर सोनपुर आईडल रहा। बीते 7 दिसम्बर को शाम 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक चले इस सोनपुर आइडल-वन का ग्रैंड फिनाले कार्यक्रम की जज अनुराधा पौंडवाल थीं। छपरा के रौनक रतन को ग्रैंड फिनाले का विजेता घोषित किया गया। अमोलिका घनाश्री को प्रथम उप विजेता एवं वेद प्रकाश को द्वितीय उप विजेता का खिताब मिला।

इस आईडल के क्वार्टर फाईनल जज कुमार सत्यम, सेमी फाईनल जज अनन्या मिश्रा थी। बीते माह 22 नवंबर को अल्तमस फरीदी, 23 नवंबर को मोनाली ठाकुर, 29 नवम्बर को नीरज श्रीधर, 30 नवम्बर को श्रद्धा पंडित, 2 दिसंबर को कुमार सत्यम की प्रस्तुति दर्शकों का जमकर मनोरंजन किया। वहीं 3 दिसंबर को कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें मशहूर हास्य -व्यंग्य के कवि डॉ अजीत जोगी
और अन्य कवियों ने बिहार गीत सहित विभिन्न प्रसंगों पर अपने काव्य पाठ किए।

इस क्रम में बीते 5 दिसंबर को अन्नया मिश्रा एवं 7 दिसंबर को अनुराधा पौडवाल ने अपने गीतों से मेला दर्शकों का मनोरंजन किया। दिवाकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम में साहित्योत्सव का आयोजन भी शानदार रहा। इसके अतिरिक्त एसएसबी सहित विभिन्न विभागों के कार्यक्रम भी इस मंच पर हुए, जिन्हें दमदार सराहना मिली।

हरिहर क्षेत्र मेला में बीते 30 नवंबर को काली घाट पर गंगा आरती, हरिहरनाथ मंदिर के पास 22 से 28 नवंबर तक रामायण का मंचन किया गया। इसी मंच पर
एक से दो दिसंबर को दो दिवसीय हरिहर नाथ महोत्सव का आयोजन किया गया। पूरी मेलावधि तक सीसीटीवी से मेला क्षेत्र की समस्त गतिविधियों पर नजर रखी गई।

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