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भगवान भोले की अनन्य भक्त 75 वर्षीय कृष्णा बम की कृष्णा माता बम बनने की कहानी

गंगोत्री प्रसाद सिंह/हाजीपुर (वैशाली)। वैशाली जिला के हद में भगवानपुर प्रखंड के प्रतापटाँड़ गांव के एक सम्पन्न किसान की पुत्री कृष्णा रानी ने वर्ष 1967 में मैट्रिक की परीक्षा पास की। जब वह स्नातक में पढ़ रही थी तो उनकी शादी वैशाली जिला के हद में धरहारा भठण्डी के नन्द किशोर पांडेय के साथ हुई।

शादी के समय नन्द किशोर पांडेय वेटनरी डॉक्टर की पढ़ाई कर रहे थे। इस दौरान सन 1971 में पांडेय के घर पर नक्सलियों ने हमला कर दिया, जिसमें उनके पिता की हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद कृष्णा रानी का ससुराल छीन भिन्न हो गया। इसके बाद कृष्णा ने अपनी पढ़ाई मायके से पूरी की और मुजफ़्फ़रपुर से शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर भगवानपुर मिडिल स्कूल में शिक्षक के रूप में नौकरी शुरू की। बाद में वे मुजफ्फरपुर स्थानांतरित होकर चली गयी और पूरा परिवार मुजफ्फरपुर में ही आकर रहने लगा।

कृष्णा को भगवान भोलेनाथ पर अटूट विश्वास था। सन 1976 से 1981 तक लगातार सावन माह में वे प्रत्येक सोमवार को डाक बम के रूप में सारण जिला के हद में पहलेजा घाट से मुजफ्फरपुर 65 किलोमीटर की दूरी 9 घण्टे में तय कर बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करती आई। सन 1981 में कृष्णा के पति कालाजार से ग्रसित होकर बहुत बीमार पड़ गये, तब कृष्ण ने मन्नत मानी कि उसके पति ठीक हो जाये तो वह सावन माह के हर सोमवार को बाबा बैधनाथ का जलाभिषेक करेगी और सन 1982 से कृष्णा ने सुल्तानगंज से गंगा का जल लेकर दौड़ते हुय देवघर पहुँच बाबा बैधनाथ का जलाभिषेक करना शुरू किया जो अनवरत वर्ष 2019 तक जारी रहा।

सुल्तानगंज से गंगा का जल लेकर मात्र 13 घण्टे में 108 किमी की दूरी तय कर देवघर पहुंचने का रिकार्ड भी कृष्णा बम के नाम है। कृष्णा रानी ने मुजफ्फरपुर के शेरपुर मिडिल स्कूल के हेडमिस्ट्रेस से सन 2013 में अवकाश ग्रहण के बाद धार्मिक यात्रा का एक रिकार्ड कायम की है। कृष्णा बम के रूप में गंगा जल लेकर जब सुल्तानगंज से बाबाधाम चलती थी तो रास्ते मे इन्हें देखने और इनका आर्शीवाद लेने के लिए श्रद्धालू सड़क किनारे खड़े रहते थे। इन्हें सुरक्षित मार्ग देने के लिये पुलिस बल साथ चलता था। बाबाधाम मन्दिर प्रशासन भी इन्हें जलाभीषेक के लिए विशेष सुविधा देता आया जो वर्ष 2019 में बंद हो गया। जिस वजह से कोरोना काल के बाद वर्ष 2022 से सिर्फ सावन के एक सोमवार को ही अब कृष्णा बम बाबा का जलाभीषेक करेंगी।

इस वर्ष कृष्णा बम ने 70 वर्ष की उम्र में भी बीते 18 जुलाई को सुल्तान गंज से गंगा का जल लिया और 18 घण्टे में 19 जुलाई को बाबा बैधनाथ पर जल अर्पण किया। वर्ष 2022 की यह उनकी अंतिम कांवर यात्रा थी। कृष्णा माता बम को देखने और उनका आशीर्वाद पाने के लिये राह में रहिवासी लालायित रहते हैं। जिनका जयकारा बिहार झारखंड ही नही पूरे देश के शिव भक्त करते हैं।

कृष्णा बम की धार्मिक यात्राएं,,

कृष्णा बम ने वर्ष 1989 में गंगोत्री धाम से गंगा जल लेकर पैदल तीन माह में अपने पुत्र के साथ ओड़िशा के रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पण किया। मुजफ्फरपुर से अमर नाथ, वैष्णो देवी साइकल से यात्रा किया। कृष्णा रानी ने हरिद्वार से एक बार गंगा का जल लेकर बाबाधाम देवघर तक कावड़ यात्रा किया। इन्होंने कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी की। वर्ष 2018 में कृष्णा रानी ने पाकिस्तान के कट्स धाम में शिवमंदिर की यात्रा की है।

वर्ष 2022 सावन माह की प्रथम सोमवारी को ओम्कारेश्वर जोतिर्लिंग पर जलाभीषेक के बाद नर्मदा के पवित्र जल को कांवड़ पर अपने पुत्र मुकेश पांडेय और 135 श्रद्धलुओं के जत्थे के साथ140 किलोमीटर पैदल चलते हुय उज्जैन में महाकाल का जलाभिषेक के बाद दूसरी सोमवारी को बाबाधाम में बाबा बैधनाथ को गंगा जल अर्पण की। वे वर्तमान में पुणे में अपने पुत्र के पास रह रही हैं। इस वर्ष अपने पुत्र के साथ नर्मदा नदी के पवित्र जल से ओंकारेश्वर में शिव को जल अर्पण के बाद 140 किलोमीटर की पैदल यात्रा 75 वर्ष की उम्र में पुरी कर उज्जैन महाकाल को नर्मदा के जल से अभिषेक किया।

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