यज्ञ समापन दिवस पर पं शुक्ल ने श्रद्धालुओं को किया भाव विभोर
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। राम चरित मानस में वर्णित भगवान श्रीराम का राज्य विश्व का आदर्शतम राज्य रहा है। जिसमें समाज के हर वर्ग और वर्ण की समस्याओं का समाधान निहित है। राम राज्य में शत प्रतिशत साक्षरता विद्यमान है। “सब गुणज्ञ पंडित, सब ज्ञानी या नहीं कोउ अबुध न लक्षण हीना।” इस प्रकार हर व्यक्ति साक्षर है।
चतुर है। अपने कर्म और धर्म में निपुण है। उक्त बातें बोकारो जिला के हद में बेरमो प्रखंड के जारंगडीह दुर्गा मंडप परिसर में आयोजित श्रीराम कथा नवाहन परायण नौ दिवसीय महायज्ञ के समापन दिवस 30 मार्च की संध्या प्रयागराज (इलाहबाद) से पधारे मुख्य प्रवचनकर्ता मानस मर्मग्य पंडित निर्मल कुमार शुक्ल ने प्रवचन के क्रम में कही।
पं शुक्ल ने कहा कि राम राज्य में कोई चोर नहीं है। सब एक दूसरे से प्रेम करते हैं। कोई रोगी नहीं है। सब स्त्रियां पतिब्रता हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम से पूर्व सूर्य वंश के राजाओं में बहु विवाह की प्रथा थी, किंतु राम राज्य में सबके लिए एक नियम बनाया गया।
जिसे राजा और प्रजा दोनों को पालना अति आवश्यक था। वह नियम था नारीब्रत। “एक नारीब्रत रत नर झारी।” सारे पुरुष पर नारी को माता के समान देखते थे। उन्होंने कहा कि जहां धर्म होता है, वहीं धन और सुख होते हैं। इस प्रकार राम राज्य में चाहूंओर सुख समृद्धि ऐश्वर्य की बहुलता थी।
पिता के सामने पुत्र और पत्नी के सामने पति की मृत्यु नहीं होती थी। बादल किसानों के आवश्यकतानुसार जल बरसाते थे और लतायें मनुष्य को समुचित मधु प्रदान करती थी। धरती सदैव सस्य श्यामला रहती थी। कोई भी महामारी, भूकंप, अकाल या बाढ़ इत्यादि की विभीषिका नहीं आती थी।
पं निर्मल कुमार शुक्ल ने कहा कि भगवान श्रीराम अपनी प्रजा से इतना प्रेम करते थे कि एक तुच्छ धोबी के कहने से उन्होंने अपनी प्राण प्रिया सीता का त्याग कर दिया। कालांतर में भगवान राम अश्वमेघ यज्ञ करने लगे, तब गुरु वशिष्ट ने कहा कि बिना पत्नी के यज्ञ संभव नहीं है। इसलिए आपको दूसरा विवाह करना पड़ेगा।
भगवान राम ने कहा कि गुरुदेव यज्ञ की सारी सामग्री गोमती नदी में प्रवाहित कर दिया जाए। यज्ञ रोक दिया जाए, क्योंकि राम के जिस हृदय सिंघासन पर सीता बिराजमान हो चुकी है, वहाँ दूसरी स्त्री का प्रवेश स्वप्न में भी संभव नहीं है। अंत में गुरु वशिष्ट के आज्ञानुसार सोने की सीता का निर्माण किया गया।
इस प्रकार श्रीराम ने अनेको यज्ञ संपन्न किये। उन्होंने कहा कि उस समय यदि श्रीराम ने विवाह का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया होता तो विचार करें कि विवाह के लिए कितनी कन्याओं की लाइन लग जाती। अयोध्या के शुदर्शन चक्रवर्ती नरेश को पति रूप में पाकर कौन स्त्री सौभाग्यशालिनी नहीं बनना चाहती। इस प्रकार राम राज्य में मानो त्रेता में सतयुग साकार हो गया।
दुर्गा मंदिर परिसर जारंगडीह में राम चरित मानस विश्राम दिवस पर सनातन धर्म के मर्मग्य विद्वान मानस महारथी पंडित निर्मल कुमार जी शुक्ल ने विशाल जनसमूह को भाव विभोर करते हुए उक्त उदगार व्यक्त किया।
इस अवसर पर यज्ञ समिति के सचिव बसंत ओझा, अमरनाथ साहा, अंजनी सिंह, योगेंद्र सोनार, राजकुमार मंडल आदि ने पुष्प आहार डालकर महाराज जी का स्वागत किया और उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही नौ दिवसीय इस महायज्ञ का गरिमापूर्ण ढंग से समापन हो गया।
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