अशोक सिंह/बगोदर (गिरिडीह)। इन दिनों गिरिडीह जिला के हद में बगोदर प्रखंड क्षेत्र का ग्रामीण इलाका पूरी तरह से महुआ के फूल की मनमोहक खुशबू से गुलजार हो रहा हैं।
बगोदर के विभिन्न गांव के नजदीक छोटे जंगलों में झारखंडी किशमिश के नाम से मशहूर महुआ चुनने के लिए आसपास के रहिवासी सुबह से ही काम में जुट जाते हैं। अहले सुबह अपने साथ टोकरी और मौना लेकर ग्रामीण अपने परिवार के सदस्यों के साथ खेतो तथा टांड तक पहुंचते है, जहां महुआ पेड़ के नीचे गिरने वाले महुआ फूलों को चुन कर एकत्रित करने में व्यस्त नजर आते हैं।
दरअसल गिरिडीह जिले के ग्रामीण क्षेत्रो के लिए महुआ की फसल ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में महुआ सीजन आने से रोजगार के लिए बाहर जाने वाले मजदुर भी यहां अपने काम काज में लग जाते है। महुआ की फसल होली के बाद से ही थोड़ी-थोड़ी मात्रा में आना प्रारंभ हो जाता है। धुप की तपिश बढ़ने के साथ ही महुआ फूलों के गिरने की मात्रा बढ़ने लगती है। इन दिनों ग्रामीण प्रतिदिन बीस से पच्चीस किलो चुनकर एकत्रित करने में सफल होते है।
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