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आजादी की अमृत यात्रा, भूमिका चौथे स्तंभ की

नंद कुमार सिंह/फुसरो (बोकारो)। आजादी के आंदोलन में पत्रकारों की भूमिका पर बीते दिनों बोकारो जिला के हद में करगली में परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा भी पत्रकारों को ही करनी थी। इसके लिए क्षेत्र के जीएम एम कोटेश्वर राव बधाई के पात्र हैं।

अब रही पत्रकारों की भूमिका के संबंध में। इस बारे में कहना चाहता हूँ कि आजादी से पूर्व पत्रकार अजिमुल्ला खान ने 1857 में अपनी लेखनी से चिनगारी भड़ाकर स्वतंत्रता संग्राम का श्रीगणेश की थी। उनकी लेख का असर ऐसा हुआ कि ब्रिटीश सरकार हिल गई थी। उनकी लेख का असर ऐसा हुआ कि ब्रिटिश सरकार हिल गई थी और हर भारतीय स्वतंत्रता की चर्चा करने लगे थे।

बाद में भारतेन्द्र हरिश्चन्द्र, महात्मा गाँधी, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय आदि ने अपनी लेखनी से चिनगारी भड़काई। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ही कई रचनाओं में स्वतंतता के दीवाने पर जादू का काम किया। महात्मा गाँधी सत्याग्रह के दीवाने पर जादू का काम किया। आन्दोलन ने स्वतंत्रता प्राप्ति में अहम भूमिका निभाई।

आज भी पत्रकार स्वतंत्रता की रक्षा के लिये लोगो को जागरूक और प्रेरित करते रहते हैं। पत्रकारो की भूमिका के संबंध में कहा है कि “धरा बेच देंगे, गगन बेच देगे, कलम के पुजारी अगर सो गये तो कुछ खद्धरधारी वतन बेच देंगे। इसलिए प्रजातांत्रिक प्रणाली की रक्षा के लिए निष्पक्ष एवं सजग पत्रकारिता देश का प्रहरी की भूमिका का निर्वाह करता है।

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