ग्रामीणों ने किया पंचायत चुनाव का बहिष्कार
सिद्धार्थ पांडेय/जमशेदपुर (झारखंड)। पश्चिमी सिंहभूम जिला (West Singhbhum District के हद में दिरीबुरु पंचायत के ठाकुरा गांव के उपर एवं बीच टोला में आजादी के 75 साल बाद भी अबतक बिजली नहीं पहुंचने से नाराज उक्त टोला के ग्रामीण इस बार वोट नहीं डालने का ऐलान किया है।
इस संबंध में 12 मई को दर्जनों ग्रामीण रहिवासियों ने कहा कि एक तरफ सारा देश बिजली समेत तमाम सुविधाओं से जुड़ रहा है, वहीं ठाकुरा टोला के रहिवासी आज भी ढिबरी युग में जीने को मजबूर हैं।
तकलीफ इस बात का है कि हमारे टोला को छोड़कर आसपास गांव व उसके तमाम टोला में बिजली सुविधा सरकार उपलब्ध करा दी है, लेकिन हमारा टोला को नजर अंदाज किया गया।
रहिवासियों के अनुसार गांव में बिजली सुविधा के लिए अनेकों बार विभिन्न जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाया गया, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिलता रहा है। सिर्फ चुनाव के दौरान पांच साल में एक बार जनप्रतिनिधि या उनके कार्यकर्ता हमसे वोट मांगते हैं। उसके बाद कभी गांव में नजर नहीं आते हैं।
हमे इसका मलाल नहीं है, कि जनप्रतिनिधि अथवा प्रशासनिक अधिकारी हमारे गांव में नहीं आते। खुशी तब होती जब बिना गांव में आये हमें बुनियादी सुविधा बहाल करने का कार्य किया जाता।
ग्रामीण रहिवासियों ने कहा कि बिजली नहीं रहने से ग्रामीणों को क्या परेशानी होती है वह सारे अधिकारी व नेता मात्र एक घंटे बिजली कटने का दंश झेलकर अनुभव किये होंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि सुविधा के नाम पर सिर्फ गांव में दो चापाकल है, जिस पर लगभग 500 से अधिक आबादी निर्भर है। ग्रामीणों ने 12 मई को बैठक कर सर्वसम्मति से निर्णय लिया की गांव में बिजली नहीं तो पंचायत चुनाव को पूरी तरह से बहिष्कार किया जायेगा।
बैठक में ग्रामीण रहिवासी प्रशांत चाम्पिया, तूराम चाम्पिया, बुधवा चाम्पिया, गुनिया चाम्पिया, दामु चाम्पिया, साधु चाम्पिया, रोया चाम्पिया, सायरा चाम्पिया, शारदा चाम्पिया, पार्वती चाम्पिया, सीता चाम्पिया, रायमनी चाम्पिया, गुरुवारी चाम्पिया, सुबूबारी चाम्पिया, आदि।
जंबी चाम्पिया, चौड़ेकर चाम्पिया, निरमुणी चाम्पिया, गीता चाम्पिया, सोनीके चाम्पिया, प्रधान चाम्पिया, जोंडो चाम्पिया, घासीराम चाम्पिया, नाग चाम्पिया सहित काफी संख्या में ग्रामीण महिलाएं एवं पुरुष मौजूद थे।
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