प्रहरी संवाददाता/तेनुघाट (बोकारो)। प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय गिरीडीह द्वारा स्थानीय श्रीश्याम कम्पलेक्स में 87वां त्रिमूर्ति शिव जयन्ती मनाया गया। धनबाद के ब्रह्मा कुमारी केन्द्र की संचालिका बीके अनु दीदी ने शिव ध्वजारोहन कर रहिवासी श्रद्धालुओं को महाशिवरात्री पर ईश्वरीय महावाक्य बोल रहीं थी।
इस अवसर पर बीके अनु ने कहा कि परमपिता परमात्मा शिव तब आते हैं जब अज्ञान अंधकार की रात्रि प्रबल हो जाती है। परम-आत्मा का ही नाम है शिव। जिसका अर्थ है सदा कल्याणकारी। शिवरात्रि व शिव जयन्ती भारत में द्वापर युग से मनाई जाती रही है। यह दिन हम ईश्वर के इस धरा पर अवतरण के समय की याद में शिवरात्री मनाते हैं।
उन्होने कहा कि शिवरात्री कहने का उद्देश्य यह है कि शिव के साथ रात शब्द इसलिए जुड़ा है क्योकि वो अज्ञान की अँधेरी रात में इस सृष्टि पर आते हैं। जब सारा संसार, मनुष्य मात्र अज्ञान रूपी रात्रि में, अर्थात माया के वश में हो जाता है। जब सभी आत्माएं 5 विकारो के प्रभाव से पतित हो जाती हैं।
जब पवित्रता और शान्ति का सत्य, धर्म व स्वयं की आत्मिक सत्य की पहचान हम भूल जाते है। सिर्फ ऐसे समय हमे जगाने, समस्त मानवता के उत्थान व सम्पूर्ण विश्व में फिर से शान्ति, पवित्रता और प्रेम का सत-धर्म स्थापित करने परमात्मा एक साधारण शरीर में प्रवेश करते हैं।
बीके अनु ने कहा कि परमात्मा शिव को त्रिमूर्ति कहने का भी काफी महत्व है। शिव ब्रह्मा द्वारा स्वर्णिम युग रूपी नव विश्व द्वारा स्थापना विष्णु द्वारा कराते हैं। शंकर द्वारा पुरानी अधर्म पूर्ण कलयुगी सृष्टि का विनाश कराते हैं। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि के प्रसंग में अज्ञानता को रात्रि से दर्शाया गया है।
अर्थात जहां पर ज्ञान का प्रकाश अनुपस्थित है। इसी अज्ञान रूपी अंधियारे के कारण ही वर्तमान में काम, क्रोध, लोभ, मोह व अहंकार का अस्तित्व सर्व व्याप्त है। इस अज्ञान रूपी रात्रि में, अधर्म अपने चरम पर है। आज अशांति, अधर्म, साधारण व गलत कर्म करना ही दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
इन सभी विकर्मों को खत्म करने व सदा के लिए सुख, शांति व प्रसन्नता प्रदान करने के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वर्तमान समय में जब घोर अज्ञान की रात्रि इस धरा पर है। सभी आत्माएं परेशान और दुःखी हैं।
तब स्वयं परमपिता शिव परमात्मा का आगमन इस धरा पर हो और वे यहाँ पुनः सुख, शांति, आनन्द, प्रेम, पवित्रता जैसे उच्चतम मूल्यों की स्थापना करें। उन्होंने कहा कि अपने विकर्मो का नाश कर परिवर्तन करने का संकल्प लेना ही सच्ची महाशिवरात्री है।
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