एस. पी. सक्सेना/बोकारो। केंद्र सरकार की उद्योग और मजदूर विरोधी नीति के खिलाफ आगामी 9 जुलाई की हड़ताल मजदूरों का भविष्य तय करेगी। केंद्र की सरकार उद्योग और मजदूर विरोधी सरकार है। इस सरकार को सबक सिखाने के लिए हड़ताल को कोयला उद्योग के मजदूर चट्टानी एकता का परिचय देते हुए सफल करेंगे।
केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मजदूरों को उनके हक और अधिकार से वंचित रखने का कुचक्र है। मजदूर इससे काफी आक्रोश में है। यह हड़ताल केंद्र सरकार को चेतावनी है। आगे इससे भी लंबी लड़ाई की तैयारी है। उक्त बात इंटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के अध्यक्ष व् बेरमो विधायक कुमार जय मंगल उर्फ अनूप सिंह ने 7 जुलाई को बोकारो जिला के हद में ढोरी स्टाफ क्वाटर स्थित अपने आवासीय कार्यालय में कही। आरसीएमयू के
विधायक ने उपस्थित यूनियन प्रतिनिधि मंडल को बताया कि हड़ताल की सफलता मजदूरों के भविष्य को तय करेगा।
सरकार मजदूरों को पंगु बनाना चाहता है, उसे उसके अधिकार से वंचित रखने का प्रयास है। कार्य की अवधि 8 घंटे से 12 घंटा किए जाने का सरकार की मंशा है। आप अपने अधिकार के लिए कभी संघर्ष नहीं कर सकते हैं। श्रम कोड में बदलाव लाकर मजदूरों को गुलाम बनाने का षड्यंत्र को समझना होगा और मजदूर इस लड़ाई को अपनी लड़ाई समझ कर आगे आए, अन्यथा उनका भविष्य अंधकारमय होगा।
यूनियन के अध्यक्ष सह विधायक ने कहा कि पूर्व में जो देश के मजदूरों खासकर कोयला मजदूरों को जो सुख सुविधा में इजाफा हुआ था, वह इंडिया गवर्नमेंट की देन थी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संरचना के विपरीत कोयला मजदूर जोखिम भरा कार्य कर देश के विकास में अपनी अग्रणी भूमिका का निर्वाह करते हैं। सामान्य जनों से उनकी आयु 10 वर्ष कम होती है।
प्रदूषण व् गैस का शिकार होते हैं। वही जब कोई व्यक्ति लाचार, विवश होता है और वह अपने आश्रित को नौकरी देने से भी वंचित है, यह सारी चीजों को कोयला मजदूरों को समझने की आवश्यकता है। कहा कि केंद्र सरकार को इस बार के हड़ताल को चेतावनी के रूप में बताते हुए आगे लंबी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार लड़ने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से यूनियन के कथारा क्षेत्रीय अध्यक्ष व् विधायक प्रतिनिधि अजय कुमार सिंह, बोकारो एवं करगली क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष दिगंबर महतो, सचिव सुबोध सिंह पवार, ढोरी क्षेत्र कि शिवनंदन चौहान, गणेश मल्लाह, रिंकू सिंह, अभय सिंह, रवि सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।
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