भूमिगत खदानों को निजी हाथों सौंपने की पेशकश
प्रहरी संवाददाता/मुंबई। दुनिया की सबसे बड़ी कोयला खनन कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Limited) (सीआईएल) अपनी 20 बंद भूमिगत कोयला खदानों को निजी क्षेत्र को दे कर फिर से खोलने और राजस्व साझाकरण मॉडल (Revenue sharing modal) पर उत्पादन में लाने की पेशकश करेगी।
इस पेशकश के बारे में निजी क्षेत्र को संवेदनशील बनाने के लिए आज मुंबई में एक इन्वेस्टर्स मीट (Investors Meet) का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम (Program) में निवेशकों को संबोधित करते हुए केंद्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि कोयला मंत्रालय का लक्ष्य कोयले के आयात को कम करना और देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
सत्र में उपस्थित निवेशकों को अवसर दिखाते हुए, जोशी ने कहा, ‘अभी कुछ समय पहले, लोग कहते थे कि कोयले की आवश्यकता कम होने जा रही है, लेकिन वर्तमान में हम कोयले की आवश्यकताओं में वृद्धि देख रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘बंद/बंद कोयला खदानों में निकालने योग्य भंडार लगभग 380 मिलियन टन है, खदानों से 30-40 मिलियन टन कोयला आसानी से निकाला जा सकता है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘खनन गतिविधियों को जारी रखने से कोयले की आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी। स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करते हुए टीपीपी।
कोयला एवं खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि देश ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति देख रहा है। उन्होंने कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों में विद्युतीकरण के लिए सरकार (Government) के प्रयासों, परिवहन में ईंधन के विकल्प बदलने, आधुनिक जीवन शैली के कारण बिजली की मांग बढ़ी है।
उन्होंने कहा, ‘जहां हम ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों को विकसित करने पर जोर दे रहे हैं, वहीं कोयला भी ऊर्जा उत्पादन में प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक होने जा रहा है।’
इस अवसर पर कोयला, खान और रेल राज्य मंत्री रावसाहेब पाटिल दानवे ने कहा कि भारत के पास दुनिया में कोयले का 5 वां सबसे बड़ा भंडार है। उन्होंने कहा, ‘सरकार का लक्ष्य घरेलू कोयला उत्पादन को वित्त वर्ष 23-24 तक 1.2 अरब मीट्रिक टन तक बढ़ाने का है।
उन्होंने कहा, ‘ईंधन के रूप में, ऊर्जा मिश्रण में कोयले का सबसे बड़ा योगदान है’। उन्होंने कहा कि ‘पहल नवीनतम खनन प्रौद्योगिकी, मजबूत प्रणालियों और प्रक्रियाओं की तैनाती का मार्ग प्रशस्त करेगी’।
केंद्रीय कोयला सचिव डॉ. अनिल कुमार जैन ने कहा कि निवेशकों के लिए यह सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा, ‘इन बंद खदानों का संचालन किया गया है जिसका मतलब है कि बुनियादी ढांचा तैयार है और प्रवेश की बाधाएं और वित्तीय बाधाएं न्यूनतम हैं’।
निवेशक बैठक में भेल, हिंडाल्को, अदानी, जेएसपीएल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड, अल्ट्रा टेक सीमेंट, वेदांत और अन्य प्रमुख उद्योग खिलाड़ियों जैसे प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।
कोल इंडिया के इस कदम का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था में ईंधन की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करना है। बंद/बंद भूमिगत कोयला खदानें सीआईएल की पांच सहायक कंपनियों, ईसीएल, बीसीसीएल, सीसीएल, एसईसीएल और डब्ल्यूसीएल में फैली हुई हैं।
167 total views, 1 views today