एस. पी. सक्सेना/वैशाली (बिहार)। बिहार भ्रमण के क्रम में बीते 25 अगस्त को अजब नजारा दिखा। इस नजारे ने संबंधित किसान को भी आश्चर्य चकित कर दिया है।
भ्रमण के क्रम में वैशाली जिला के हद में हाजीपुर सदर प्रखंड के पानापुर लंगा के एक बगान में लगे केला वृक्ष में लगा केला फल ने चौकने पर मजबूर कर दिया। यह फल अन्य केला फल से अलग हटकर है।
आमतौर पर कच्चा केला का रंग हल्का अथवा गहरा हरा होता है, लेकिन पानापुर लंगा रहिवासी हरि अनुग्रह (किट्टर) एवं प्रोफेसर शिव अनुग्रह (पिट्टर) के घर के समीप लगा केला वृक्ष के केला कंदा (घउर) में लाल रंग का केला फल दिखा। पहले तो यह दृश्य देख अपनी आंखो पर एकबारगी विश्वास हीं नहीं हो रहा था। जिज्ञासावश पुछे जाने पर किसान हरि अनुग्रह ने बताया कि उन्हें इस वृक्ष को एक मित्र ने लाकर दिया था।
बताया कि उनके मित्र ने भी एक वृक्ष अपने घर के समीप लगाया था, परन्तु वहां उक्त केला वृक्ष अचानक सुख गया। जबकि, उनके बगान में लगा यह वृक्ष अबतक नहीं सुखा है। बताया कि लगभग पंद्रह दिन पुर्व पेड़ से पहला कंदा निकला तब केला फल पुरी तरह लाल था। यह धीरे-धीरे अपना रंग बदलते हुए अब गहरा लाल हो गया है।
किसान ने बताया कि वे इस केला फल को देख काफी उत्साहित हैं। कहा कि इसका फल यदि स्वादिष्ट और किसी प्रकार से हानि नहीं पहुंचाएगा तो आगे चलकर वे इसका विस्तार भी करेंगे, ताकि केला का एक नया नस्ल बाजार में अपना जलवा बिखेर सके। उन्होंने बताया कि आम का मौसम की समाप्ति के बाद भी उनके बगान में अब भी दो वृक्ष में अच्छी तादाद में आम लगा हैं।
ज्ञात हो कि पुरे देश में केला उत्पादन के लिए मशहूर हाजीपुर में उक्त रंगीन केला ने क्षेत्र के कृषको व् कृषि वैज्ञानिको को इस दिशा में सोंचने पर मजबूर कर दिया है। कयास लगाया जा रहा है कि ऐसा केला वैशाली जिला सहित आसपास के लगभग दर्जनभर जिला में शायद हीं होगा।
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