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जंगल से अंधाधुंध वृक्षों की अवैध कटाई से खतरे में जंगल का अस्तित्व

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला सहित आसपास जिलों के वन क्षेत्रों में इन दिनों अंधाधुंध वृक्षों की अवैध कटाई की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। अवैध लकड़ी माफियाओं द्वारा रात के अंधेरे में की जा रही वृक्षों की कटाई से जंगल का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले वर्षों में क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।

बोकारो जिला के हद में कसमार, गोमिया तथा नावाडीह प्रखंडो के ग्रामीण क्षेत्र में रहनेवाले स्थानीय रहिवासियों का कहना है कि लगातार पेड़ कटने से वन्य जीवों का आश्रय स्थल समाप्त होता जा रहा है। जंगलों की हरियाली घटने से तापमान में वृद्धि, वर्षा में असंतुलन और जल स्रोतों के सूखने जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार पेड़ केवल लकड़ी का स्रोत नहीं, बल्कि जीवनदायिनी ऑक्सीजन, वर्षा चक्र और मिट्टी संरक्षण के महत्वपूर्ण आधार हैं। कहा गया कि स्थिति की गंभीरता का एक बड़ा कारण वन विभाग में कर्मियों की कमी भी है। कई वन क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में वनरक्षी और अधिकारी तैनात नहीं हैं, जिसके कारण नियमित गश्ती और निगरानी प्रभावित हो रही है। सीमित संसाधनों और कम मानव बल के कारण अवैध कटाई करने वाले तत्वों के हौसले बुलंद हैं।

बताया जाता है कि माफिया तत्वों द्वारा इतना ही नहीं, पेड़ काटने के बाद उस जमीन पर भी अवैध कब्जा कर लिया जाता है। आरोप है कि जंगल की जमीन को साफ करने के बाद फर्जी या गलत कागजात तैयार कर उसे बेचने का खेल भी बड़े पैमाने पर चल रहा है। इससे न केवल वन क्षेत्र सिकुड़ रहा है, बल्कि सरकारी भूमि पर अवैध कारोबार को भी बढ़ावा मिल रहा है।

ध्यान देने योग्य है कि, वन विभाग को इस दिशा में सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। नियमित गश्ती, अवैध कटाई और जमीन की फर्जी खरीद-फरोख्त में संलिप्त तत्वों पर कठोर कार्रवाई तथा जनजागरूकता अभियान चलाकर ही जंगलों को बचाया जा सकता है। साथ ही, ग्रामीणों की सहभागिता से वन संरक्षण समितियों को सक्रिय करना समय की मांग है। यदि आज जंगल नहीं बचाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को केवल बंजर भूमि और प्रदूषित वातावरण ही विरासत में मिलेगा। इसलिए जरूरी है कि प्रशासन और समाज मिलकर पेड़ बचाओ, जंगल बचाओ का संकल्प लें और धरती की हरियाली को सुरक्षित रखें।

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