प्रहरी संवाददाता/बोकारो। बोकारो जिला के हद में गोमिया प्रखंड क्षेत्र के स्वांग महावीर स्थान रहिवासी रिजवान अंसारी का शव उसकी मृत्यु के 13 दिनों के बाद मलेशिया से उसके घर पहुंचा। शव की एक झलक देखने के बाद परिजनों के साथ-साथ क्षेत्र में गम का माहौल छा गया।
स्थानीय अंजुमन सेक्रेट्री मुमताज आलम, नईफ सदर हाजी फजले गनी सहित बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं बच्चे उपस्थित थे। जानकारी के अनुसार बीते 1 जून को मलेशिया मे झारखंड के प्रवासी मजदूर रिजवान अंसारी की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। बताया जाता है कि उसका शव पेड़ से झुलता पाया गया था। मृतक के साथ काम करने वाले उनके सहयोगियों ने इसकी सूचना मृतक के परिजनों को दी।
परिजनों ने उसकी सूचना स्थानिय अंजुमन कमिटी के सेक्रेटरी सह झामुमो नेता मुमताज अलम को दी। अलम ने मंत्री योगेंद्र प्रसाद को जानकारी देते हुए बताया कि 2 जून को मृतक का शव मलेशिया से यहां मंगाने की गुहार सूबे के मंत्री योगेंद्र प्रसाद से लगायी गयी। मंत्री के पहल के बाद शव को 14 जून को लाया जा सका। इस अवसर पर स्थानिय अंजुमन कमिटी के सेक्रेटरी मुमताज अलम ने बताया की मृतक रीजवान अंसारी की मृत्यु का खबर एक जून की संध्या मुझे मिला।

इसके बाद उन्होंने मंत्री योगेंद्र प्रसाद को घटना को संज्ञान में देते हुए शव को भारत मंगाने की गुहार लगाई। उन्होंने बताया की मंत्री ने अपने स्तर पर तत्परता दिखाते हुऎ शव को मंगाने को लेकर दिल्ली उच्च आयोग से संपर्क कर शव को भारत भेजने का आग्रह किया। बताया कि मंत्री के पहल के बाद यह संभव हो पाया कि मृतक का शव 14 जून को स्वांग महावीर स्थान मृतक के घर लाया जा सका है।
आलम ने बताया कि मृतक रीजवान का 100 मलेशिया से बीते 13 जून की अर्ध रात्रि कोलकाता पहुंचा, जहां से उनके देखरेख में आज दोपहर शव को मृतक के घर लाया गया। उन्होंने केंद्र तथा झरखंड सरकर से मृतक के आश्रित को रोजगार व उचित मुआवजा राशि उपलब्ध कराने की मांग की है। मृतक की बेबा खुर्नशिदा बानो ने बताया कि उसका मरहूम शौहर घर का इकलौता कमाने वाला था। उनके इंतकाल से उसका तथा एकमात्र 14 वर्षीय पुत्र का जीवन अंधकारमय हो गया है।
मृतक के ससुर अली हुसैन में बताया कि परिवार को देखने वाला अब कोई घर में नहीं रह गया है। ऐसे में वे सरकार से मांग करते हैं कि मृतक रिजवान के पुत्र की पढ़ाई की समुचित व्यवस्था, मृतक की पत्नी के भरण पोषण, नियमानुसार मुआवजा एवं बिमा लाभ उपलब्घ कराने का पहल करे।
मौके पर अंजुमन कमिटी के नाइफ सदर हाजी फजले गनी, साबिर हुसैन, मोहम्मद हसन, गुलाम नबी, मोहम्मद हसनैन ऊर्फ मुन्ना आदि अपस्थित थे।

ज्ञात हो की मृतक वर्ष 2017 में रिजवान सबसे पहले कमाने मलेशिया गया था। तीन साल बाद वह 2020 मे वापस लौट आया। पुनः कोरोना का प्रकोप समाप्त होने पर वर्ष 2023 मे वह मलेशिया जाकर फेल्डा गलोबल भेन्चरश शन बीएचओ कम्पनी मे अल आजमी एक्सपोर्ट के माध्यम से कार्यरत था, जहां बिते एक जून को उसका शव संदिग्ध हालत में पेड़ से लटकता पाया गया। कहीं यह आत्महत्या करार देकर मृतक के परिजनों को मिलनेवाले लाभ से बंचित करने की साजिश तो नहीं।
मृतक के परिजनो ने हत्या की अशंका जाहीर करते हुए केंद्र व् राज्य सरकार से न्याय की मांग की है। आश्चर्य यह कि पेड़ से रस्सी के सहारे लटकते शव के माथे के उपरी हिस्से को बेंडेज पट्टी से बांधा गया था, जिसे आज दोपहर दो बजे स्थानीय कब्रिस्तान में दफना दिया गया।
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