डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रवाद की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था-रविन्द्र
एन. के. सिंह/फुसरो (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में फुसरो बाजार स्थित गिरिडीह के पुर्व सांसद रविन्द्र कुमार पांडेय के आवासीय कार्यालय में 6 जुलाई को देश की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वी जयंती मनाई गई। उपस्थित सभी अतिथियों ने डॉ मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजली दी।
इस अवर पर पुर्व सांसद पांडेय ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को महान राष्ट्रवादी बताया। कहा कि जनसंघ के संस्थापक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता रहे डॉ मुखर्जी देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री थे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में स्वतंत्र भारत के तीन साल तक मंत्री के रूप में अपनी भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने कई अहम काम किए, जो बाद में भारत के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित हुआ। कहा कि डॉ मुखर्जी का जन्म छह जुलाई 1901 में हुआ था। मात्र 33 वर्ष की उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति के रूप में उन्होंने अपनी सेवाएं दी थी। वे एक प्रखर वक्ता के साथ महान शिक्षाविद, महान स्वतंत्रता सेनानी थे। कहा कि उन्होंने पूरा जीवन राष्ट्रमाता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था।
पांडेय ने कहा कि बंगाल में अकाल के दौरान उनकी सेवाओं को पूरा देश याद करता है। तत्कालीन सरकार के जम्मू कश्मीर में धारा 370 लागू करने और परमिट सिस्टम का उन्होंने पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे।
मौके पर दिनेश सिंह, भाई प्रमोद सिंह, रोहित मित्तल, अनिल गुप्ता, नवल किशोर सिंह, मनोहर महतो, प्रह्लाद महतो, मृत्युंजय कुमार पांडेय आदि उपस्थित थे।
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