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प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी देवी सरस्वती की आकर्षक प्रतिमा की हो रही खूब बिक्री

मूर्तियों में झलक रही है राजस्थानी मूर्तिकारों का सौंदर्य बोध

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सरस्वती पूजा को लेकर सारण जिला के हद में सोनपुर मेला के गाय बाजार में राजस्थान के जोधपुर से पहुंचे मूर्तिकारों की टोली ने प्लास्टर ऑफ पेरिस व् व्हाइट मिट्टी के मिश्रण से कला व विद्या की देवी सरस्वती की एक से बढ़कर एक आकर्षक मूर्तियों का निर्माण किया है, जिसकी जमकर बिक्री हो रही है।

बताया जाता है कि बड़ी संख्या में बनी इन मूर्तियों को खूबसूरत व आकर्षक बनाने में मूर्तिकारों की कला साधना का परिचय मिलता है।जैसे – जैसे मूर्तियों का निर्माण और उसमें रंग भरता जा रहा है, वैसे-वैसे इसके स्वरूप में कलात्मक निखार देखा जा रहा है। मुख्य सड़क से गुजरते यात्री इन मूर्तियों को देखकर ठहर जाते हैं। आकर्षण इतना है कि देवी के इन छोटी -बड़ी मूर्तियों को देखकर दर्शक अपलक निहारते रह जाते हैं।

इस वर्ष के आगामी 23 जनवरी को होनेवाली सरस्वती पूजा को लेकर यह तैयारी जोर-शोर से चल रही है। पूजा के इस माहौल को दृष्टि में रखते हुए ही जोधपुर के मूर्तिकारों का जत्था यहां पहुंचा है। पूजा निकट आते -आते लगभग सभी मूर्तियों की बिक्री हो जाती है। कहिए तो बहुत सारी मूर्तियों की बुकिंग हो चुकी है। लाखों का कारोबार मूर्तिकारों के परिवारों के जीवन और रोजी रोटी से जुड़ा है, जिसके लिए देश के विभिन्न भागों में इनका प्रवास होता रहता है। उनमें सोनपुर मेला का परिक्षेत्र भी एक है।

खास बात यह कि मूर्तियों को मजबूती देने के लिए मिट्टी में नारियल के रेशे का घोल मिलाया जाता है, जिससे प्रतिमा हल्की होती है। देवी की मूर्तियों का श्रृंगार करने में पुरुष एवं महिला मूर्तिकार संलग्न हैं। जैसे ही मूर्तियों में रंग भरती जा रही है, वैसे ही मूर्तियां सजीव नजर आने लगी हैं।

क्या कहते हैं देवी की मूर्तियों को गढ़नेवाले राजस्थानी मूर्तिकार

राजस्थान के जोधपुर रहिवासी युवा मूर्तिकार व विक्रेता नारायण लाल का कहना है कि सोनपुर के इस वर्तमान जगह पर राजस्थान के मूर्तिकार पिछले 15 -20 वर्ष से आ रहे हैं। त्योहारों के मौसम में जोधपुर के मूर्तिकारों का जत्था सोनपुर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर मूर्तियों का निर्माण कर बिक्री करते हैं। उन्होंने बताया कि सोनपुर में इस बार देवी सरस्वती की छोटी -बड़ी मूर्तियों की मांग को देखते हुए निर्माण किया गया है। ये मूर्तियां डेढ़ सौ रुपए से आठ हजार तक रुपए में मिल रही हैं। पहले से ही ऑर्डर पर कई मूर्तियां बिक चुकी है। कम कीमत की वजह से इन मूर्तियों के प्रति आमजनों का आकर्षण बढ़ता जा रहा है। इन मूर्तियों के स्वरूप को निखारने में महिला मूर्तिकारों की बड़ी भागीदारी है।

पर्यावरण के अनुकूल नहीं है प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां

वैसे, पर्यावरणविदों का मानना है कि भले प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां सस्ती, हल्की और आकर्षक होती हैं, परंतु पर्यावरणीय दृष्टि से इसका निर्माण, बिक्री और उपयोग पर कुछ बंदिशे है। सार्वजनिक नदी – तालाबों में प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों को विसर्जन करने से मनाही है। कहा गया कि मिट्टी से बनी मूर्तियां पानी में जल्दी घुल जाती हैं, परंतु प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों को घुलने में समय लगता है। इसमें जो रसायन तत्व होते हैं वे भी जल प्रदूषण को बढ़ावा देते हैं। जो पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

अदालतों ने भी इसे पर्यावरण की दृष्टि से प्रतिकूल बताया है। बावजूद इसके देवी सरस्वती की मूर्तियों की बिक्री में कोई कमी नहीं आई है। सस्ता और हल्का होने के साथ – साथ अधिक खूबसूरत होना ही इन मूर्तियों की सबसे बड़ी खासियत और बिक्री का कारण है। इन्हें सजावट के रूप में घरों में रखने के लिए भी खरीददारी की जा रही है।

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