भक्त की भक्ति में श्रद्धा व् सच्चाई हो तो ईश्वर करते हैं उसकी रक्षा-जगद्गुरु लक्ष्मणाचार्य
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व विख्यात हरिहर क्षेत्र सोनपुर के श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थान नौलखा मन्दिर में 11 मई की संध्या वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान नरसिंह की जयंती विधि-विधान से मनाई गई। भगवान के श्रीविग्रह का अभिषेक किया गया। वस्त्र और आभूषण से उन्हें अलंकृत किया गया। भक्तों ने इस अद्भुत और अलौकिक दृश्य का भरपूर आनन्द उठाया।
भगवान नरसिंह के प्राक्ट्योत्सव के अवसर पर भगवान की जय जयकार से हरिहरक्षेत्र सोनपुर का संपूर्ण इलाका गूंज उठा। उक्त अवसर पर हरिहर क्षेत्र पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि को भगवान श्रीहरि विष्णु ने नरसिंह अवातर लिया था। इसे नरसिंह चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के कई अवतारों में नरसिंह चौथा अवतार है, जिसमें उनका रूप आधा सिंह और आधा मानव का है। भगवान ने यह अवतार भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए लिया था, जोकि इस बात का भी प्रमाण है कि भक्त की भक्ति में अगर श्रद्धा और सच्चाई हो तो ईश्वर प्रकट होकर जरूर रक्षा करते हैं।

स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने कहा कि हिरण्यकश्यप नामक एक दैत्य था, जिसने अपनी तपस्या से ब्रह्माजी को प्रसन्न कर यह वरदान प्राप्त किया था कि किसी भी अस्त्र से उसकी मृत्यु असंभव है। उसे ना ही कोई अस्त्र, न ही शस्त्र, ना ही दिन, ना ही रात, न बाहर, ना ही घर में, न पृथ्वी और ना ही आकाश में मार सकता है। लेकिन इस वरदान को पाकर हिरण्यकश्यप ने इसका गलत फायदा उठाया और प्रजाजन को परेशान करने लगा। वह अपनी प्रजा से कहता था कि उसकी पूजा करे।
यहां तक कि आततायी हिरण्यकश्यप तीनों लोकों पर भी अपना आधिपत्य जमाना चाहता था। लेकिन हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहता था। उनकी पूजा-अर्चना करता था। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को विष्णुजी की भक्ति करने के लिए कई बार मना किया और हर तरह से यह कोशिश की कि प्रह्लाद भगवान की अराधना न कर सके। लेकिन प्रह्लाद ने अपने पिता की एक नहीं सुनी।
तब हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को ही मारने की साजिश रची, जो भगवान विष्णु की कृपा से नाकाम रही और विष्णु भक्त प्रह्लाद बच गया। इस पर हिरण्यकश्यप गुस्से से आग-बबूला हो गया। उन्होंने कहा कि एक बार प्रयास असफल होने के बाद उसने दोबारा अपने पुत्र प्रह्लाद को मारने की कोशिश की। तब आखिरकार भक्त की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया। भगवान नरसिंह खंभे से अवतरित हुए।

उन्होंने मुख्य दरवाजे के बीच हिरण्यकश्यप को अपने पैर पर लेटा कर अपने नाखूनों की मदद से उसका वध कर दिया। इस तरह नरसिंह अवतार लेकर भगवान ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। जिस कारण हर साल वैशाख शुक्ल की चतुर्दशी पर नरसिंह जयंती मनाई जाती है और भगवान विष्णु के इस अवतार की पूजा-अराधना की जाती है।
इस अवसर पर भगवान के श्रीविग्रह का अभिषेक कर वस्त्र आभूषण से अलंकृत कर अलौकिक आनन्द सहित भगवान नरसिंह का प्राक्ट्योत्सव मनाया गया। इस अवसर पर दिलीप झा, समाजसेवी लाल बाबू पटेल, रमाकांत सिंह, राजीव सिंह, फूल देवी, कान्ति देवी, कुसुम देवी सहित सैकड़ो श्रद्धावान सम्मिलित हुए और प्रसाद ग्रहण किए।
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