रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ के नेतृत्व में दस सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल 29 दिसंबर को बोकारो इस्पात संयंत्र के मुख्य महाप्रबंधक नगर सेवा कुंदन कुमार से उनके नगर सेवा भवन स्थित कार्यालय में भेंट की।
बताया जाता है कि मुख्य महाप्रबंधक नगर सेवा से मिलकर प्रतिनिधिमंडल यहां के स्थानीय सिटी सेंटर स्थित बचत उद्यान जिसका नाम अब ओएनजीसी पार्क हो गया है की दुर्दशा का वर्णन करते हुए इसे बचाने हेतु ज्ञापन दिया। जिसकी प्रतिलिपि संयंत्र के निदेशक प्रभारी को प्रेषित की गई है।
वार्ता के क्रम में मुख्य महाप्रबंधक को बताया गया कि यह पार्क जिसे ओएनजीसी ने बोकारो इस्पात संयंत्र प्रबंधन से गोद लिया है। आज लापरवाही तथा अनदेखी के कारण यह न सिर्फ अस्तित्व खो रहा है, बल्कि नशेड़ियों, असामाजिक तत्वों और खानाबदोशों का अड्डा बन गया है।
कहा गया कि पार्क में चारों तरफ झाड़ियां और गंदगी भरी पड़ी है। कहा गया कि राहगीरों ने इस पार्क को मूत्र त्यागने का सबसे सुरक्षित स्थान बना लिया है। दुर्गंध इतनी अधिक व्याप्त है कि यहां पांच मिनट भी खड़ा हो पाना कठिन है। पार्क के बगल में ही शराब की दुकान खुल जाने से महिलाओं, बच्चों एवं सभ्य नागरिकों ने इधर आना छोड़ दिया है। कहा गया कि इसके भीतर बना शौचालय भी बंद रहता है।
प्रतिनिधिमंडल द्वारा कहा गया कि सिटी सेंटर जैसे प्रतिष्ठित व्यवसायिक क्षेत्र में यह पार्क रहिवासियों में बचत की भावना पैदा करने के साथ ही बच्चों के खेल कूद और थोड़ी देर पेड़ों की छांव में समय गुजारने की दृष्टि से बनाया गया था। जिसकी मनोरंजक छवि को देखने दूर दूर से पर्यटक आते थे। कई बार स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान के पर्यावरण-रक्षकों द्वारा इसकी साफ सफाई भी की गई तथा इसे सुव्यवस्थित करने हेतु ओएनजीसी से गुहार भी लगाई गई, मगर ऐसा लगता है।
जैसे इसके पदाधिकारी कान में तेल डालकर सोए हों। ओएनजीसी इस पार्क का नाम ‘बचत उद्यान’ से बदल कर ‘ओएनजीसी पार्क’ रखकर अपनी जिम्मेदारी भूल गया है। कहा गया कि बोकारो इस्पात संयत्र प्रबंधन भी इसे ओएनजीसी के जिम्मे सौंपकर इस पार्क के प्रति अपनी जबाबदेहियों को भूल गया है।संस्थान के महासचिव मुकुल ने कहा कि अगर ओएनजीसी इस पार्क को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में अक्षम और असफल रहता है।
तथा इस्पात संयंत्र भी इस पार्क को संभालने में अपने को असमर्थ पाता है तो इस पार्क को स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान को दे दिया जाय। संस्था द्वारा सिटी सेंटर एवं शहर के प्रबुद्ध समाजसेवियों और पर्यावरण प्रेमियों की समिति बनाकर इस पार्क की देखरेख की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल को मुख्य महाप्रबंधक ने आश्वासन दिया कि ओएनजीसी से बातकर इस पार्क को सुव्यवस्थित करने हेतु दबाव देंगे, अन्यथा उससे इस पार्क को वापस लेकर फिर आगे इसकी देखरेख हेतु विचार किया जाएगा।
प्रतिनिधि मंडल में कार्यकारी अध्यक्ष रघुबर प्रसाद, महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’, मानवाधिकार मिशन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव मिश्र, पर्यावरण संरक्षण संयोजक मृणाल कांत चौबे, वृक्ष संरक्षण संयोजक वीरेंद्र चौबे, नशामुक्ति संयोजक लक्ष्मण शर्मा, भाजपा नेत्री ममता गोस्वामी, शैलेंद्र तिवारी, भगवान पांडेय और योगेंद्र सिंह शामिल थे।
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