सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पूर्वी सिंहभूम जिला के टाटानगर स्थित रेल सिविल डिफेंस द्वारा रेलवे भर्ती बोर्ड से नव नियुक्त सहायक लोको पायलट और रिफ्रेशर लोको पायलटो को ट्रेन की इंजन और कोच में आग लगने, आवश्यक कार्य और कर्तव्य का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेंनिंग सेंटर में आयोजित की गई।
जानकारी के अनुसार उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रार्थना सभा से आरंभ की गयी। इस अवसर पर ट्रेन की इंजन और कोच में आग लगने के प्रमुख कारणो पर प्रकाश डालते हुए सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर व् राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित सदस्य संतोष कुमार ने बताया कि यात्रियों द्वारा ज्वलनशील पदार्थों के साथ सफर करना जैसे स्टॉप गैस सिलेंडर, केरोसिन, पेट्रोल, पटाखा इत्यादि ले जाना साथ ही यात्रियों का ट्रेन में बीड़ी, सिगरेट, माचिस तीलियों के जलते टुकड़ों को लापरवाही पूर्वक इधर-उधर फेंक देना, पैंट्री कार में गैस सिलेंडर का रिसाव, विद्युत उपकरण ऑन एवं शॉर्ट सर्किट का प्रॉपर मेंटेनेंस ना होना, खुले और टेंपरेरी कनेक्शन, लटकते विद्युत तार, जॉइंट सिक्योर ना होना, ट्रेक्शन यूनिट लोकोमोटिव में डिफेक्ट होना आदि कोच में आग लगने के प्रमुख कारण हैं।

वही इंजन में आग लगने के प्रमुख कारण उपकरणों का मेंटेनेंस या रख-रखाव ठीक से ना होना, सेफ्टी उपकरणों का पर्याप्त मात्रा में ना होना, इलेक्ट्रिक केबल का व्यवस्थित रूप से ना होना जिसकी वजह से शॉर्ट सर्किट होकर इंजन में आग लग जाती है। उन्होंने बताया कि ट्रेन में आग लगने पर लोको पायलट को आवश्यक कार्रवाई करने होते हैं। गाड़ी को फलेसर लाइट जलते हुए उचित स्थान पर खड़ी करनी चाहिए।
रेल यात्री को बाहर निकलने का प्रबंध करते हुए ट्रेन की स्थिति की जानकारी स्टेशन मास्टर को देनी है। जिस कोच में आग लगी है उसे दोनों तरफ के कोच से कम से कम 45 मीटर अंतराल में अलग कर रखना है। कहा कि गाड़ी को रोल होने से बचने के लिए प्रोटेक्शन करना, उपलब्ध साधनों से आग बुझाने का प्रयास और ट्रेन स्टाफ द्वारा आसपास उपलब्ध साधनों जैसे पानी, मिट्टी, रेत इत्यादि का भी इस्तेमाल कर राहत कार्य करना चाहिए।
उन्होंने ट्रेन में रखे अग्निशामक संयंत्र की जानकारी देते हुए बताया कि सभी इंजन में चार ब्रेक वेन में दो और प्रत्येक एसी कोच में दो दो, पैंट्री कार और जनरेटर कार में चार-चार फायर संयंत्र रहता है। छोटी आग बुझाने के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होती है। आपात स्थिति में इसका प्रयोग कर जानमाल की सुरक्षा के साथ संपत्ति की रक्षा कर सकते हैं।
साथ ही सिविल डिफेन्स इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने प्रशिक्षणार्थी लोको पायलट को रूल ऑफ़ नाइन, ट्राई एज विधि, शरीर में आग लगने स्टॉप ड्रॉप एण्ड रॉल, दुआ से भरे इंजन से निकलने और रेस्क्यू करने की डेरक और क्रॉलिग विधि का प्रशिक्षण दिया। द्वितीय पहड़ में डेमोंस्ट्रेटर शंकर कुमार प्रसाद द्वारा फायर संयंत्र के उपयोग करने की विधि, सावधानियां के साथ सीपीआर देने का प्रशिक्षण दी गई। डेमोंस्ट्रेटर अनामिका मंडल ने प्राथमिक चिकित्सा वैण्डेज करने के नियमो का प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड रांची, कोलकाता, मालदा से नव चयनित सहायक लोको पायलट के साथ आरआरसी बैच के कुल चार सौ तीस प्रशिक्षणार्थी लोको पायलट उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के अंत में लोको पायलटो ने सिविल डिफेंस द्वारा प्रशिक्षण दिए जाने की उन्नत विधि की प्रशंसा की।
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