एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में मकोली स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल ढोरी में आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर के कनीय और वरीय संभाग में हवन तथा अन्य कई प्रकार के सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
विद्यालय के प्रातः कालीन प्रार्थना सभा के उपरांत प्राचार्य सत्येंद्र कुमार ने विद्यालय परिसर में आयोजित सांस्कृतिक गतिविधियों में बच्चों को संबोधित करते हुए बताया कि स्वामी दयानंद ने न सिर्फ आर्य समाज की स्थापना की वरन उन्होंने कर्म सिद्धान्त, पुनर्जन्म और सन्यास के सिद्धांतों के बारे में भी बताया। डीएवी जैसी संस्था उनकी उसी स्मृति का एक प्रमाण है।
उन्होंने बताया कि पिता लालजी तिवारी (कर्षणजी महाराज) और माता यशोधरा की गोद में पले बढ़े मूल शंकर का जन्म 12 फरवरी 1824 ई० में गुजरात के टंकारा में हुआ। आर्य समाज शुद्धि आंदोलन और वेदों की ओर लौटो का जयघोष सनातन हिंदू संस्कृति का प्रतीक माना जा सकता है। सत्यार्थ प्रकाश संस्कार, विधि तथा यजुर्वेद भाष्य के प्रणेता ने जो वैचारिक क्रांति उत्पन्न की आज उसी का प्रतिफल है कि भारतीय संस्कृति जीवित और जीवंत बनी हुई है।
कार्यक्रम में हवन, भजन, कविता वाचन तथा अलग-अलग वक्ताओं द्वारा स्वामी दयानंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। बताया गया कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में 2 वर्षीय विश्वव्यापी आर्य समाज के आयोजनों का शुभारंभ करने जा रहे हैं।
यहां आयोजित कार्यक्रम की सफलता में प्रमुख रूप से अशोक पाल, श्वेता, आरती, पूजा, सरनजीत, पिंकी मलिक, रिमी, डॉ एस कुमार, डॉ एस बी नारायण, मुकेश कुमार, राकेश कुमार, एल के पाल, एस के शर्मा, साधुचरण शुक्ला तथा अन्य शिक्षक शिक्षिकाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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