श्रीगजेन्द्र मोक्ष मंदिर का पट 28 अक्टूबर के सायं 4 बजे से रहेगा बंद
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहरक्षेत्र सोनपुर के प्रसिद्ध श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम् नौलखा मन्दिर में चंद्र ग्रहण और उसके सूतक को लेकर भगवान के गर्भ गृह का पट आगामी 28 अक्टूबर को सायं चार बजे से बन्द हो जायेगा। अगले दिन 29 अक्टूबर को पांच बजे सुबह विशेष अभिषेक और नित्याराधन उपरान्त श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ गर्भगृह का पट खुलेगा।
आश्विन शुक्ल पूर्णिमा 28 अक्टूबर को रात्रि 1 बजकर 5 मिनट पर चन्द्र ग्रहण लगने के कारण ऐसा निर्णय लिया गया है। रात्रि 1 बजकर 44 मिनट पर चन्द्र ग्रहण का मध्य तथा रात्रि 2 बजकर 24 मिनट पर मोक्ष अर्थात चन्द्र ग्रहण समाप्त होगा।

उक्त बातें 26 अक्टूबर को हरिहरक्षेत्र सोनपुर स्थित श्रीगजेंद्र मोक्ष देवस्थानम दिव्यदेश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि चन्द्र ग्रहण में नौ घंटे पूर्व सूतक काल शुरू होने के कारण श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम् में विराजमान भगवान श्रीवेंकटेश्वर तिरुपति बालाजी भगवान का उस दिन प्रातः काल 5 बजे मंगला आरती विश्वरूप दर्शन होगा।
प्रातः काल 9 बजे नित्य श्रृंगार आरती, तीर्थ गोष्ठी प्रसाद होगा। मध्याह्न 11 बजे राज भोग होगा और नित्य पट बंद मात्र एक घंटे होकर साढ़े 12 बजे श्रीभगवान का उत्थापन भोग होगा।
शरद पूर्णिमा महोत्सव का होगा आयोजन
स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने कहा कि 28 अक्टूबर को अपराह्न 2 बजे से 3 बजे तक शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया जाएगा। सायं 3:45 तक नित्य संध्या आरती क्षीरान्न भोग के बाद शयन आरती होकर पट बंद हो जायेगा। उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन रात का खास महत्व रहता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा भी कहते हैं।
इस दिन रात में चन्द्रमा की किरणों से अमृत बूंद बरसता है। कहा कि चन्द्रमा की किरणों में दूध अथवा खीर रखने से उसमें अमृत गुण आ जाता है। इसलिए खीर को चन्द्रमा की रोशनी में रखकर बाद में उसका सेवन करते हैं। चूंकि शरद पूर्णिमा की रात्रि में चन्द्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होते है, इसलिए चन्द्र किरणों का शरीर पर पड़ना बहुत ही शुभ माना जाता है।
देवस्थानम् नौलखा मन्दिर प्रबंधक नन्द कुमार बाबा ने बताया कि स्वामी जी का संदेश है कि शरद पूर्णिमा की रात्रि ग्रहण काल में भी सभी सज्जन चन्द्रमा की रोशनी में बैठ भगवन्नाम जप करें। इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। ग्रहण के अन्त में स्नान आदि करके आप खीर को खुले आसमान के नीचे रख सुबह ग्रहण कर सकते हैं, जो शुभ रहने वाला है।
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